विस्तृत उत्तर
कर्ण अपने मित्र दुर्योधन के प्रति अपनी निष्ठा और अर्जुन को मारने की अपनी जीवन भर की महत्त्वाकांक्षा के बीच फँसा हुआ था। घटोत्कच ने कौरव सेना पर ऐसा कहर बरपाया था कि स्थिति पूरी तरह हाथ से निकल रही थी। परिस्थितियों और दुर्योधन की भावनात्मक अपील से विवश होकर कर्ण ने अपने मित्र की सेना को बचाने का निर्णय लिया और इंद्र के उस घातक अस्त्र का आह्वान करके वासवी शक्ति को घटोत्कच पर चला दिया। इस प्रकार उसने अर्जुन के लिए बचाकर रखा अपना सबसे बड़ा हथियार व्यर्थ कर दिया।
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