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विस्तृत उत्तर
इंद्र ने कर्ण के अटूट प्रण का लाभ उठाने का निश्चय किया। कर्ण का प्रण था कि वह सूर्य की सुबह की पूजा के बाद किसी भी याचक को खाली हाथ नहीं लौटाएगा। इस प्रण का लाभ उठाकर इंद्र ने एक वृद्ध ब्राह्मण का वेश धारण किया और कर्ण के पास पहुँचे। उन्होंने भिक्षा में कर्ण से उसके कवच और कुंडल ही मांग लिए।
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