शिव पूजा नियमशिव मंदिर में दक्षिणा कैसे और कितनी देनी चाहिए?यथाशक्ति — कोई निश्चित राशि नहीं। विषम संख्या (1/5/11/21/51/101) शुभ। दाहिने हाथ से, श्रद्धापूर्वक। 'दक्षिणा विहीना पूजा निष्फला' — भाव प्रधान। अन्नदान सर्वश्रेष्ठ।#दक्षिणा#दान#मंदिर
दिव्यास्त्रइंद्र ने कर्ण को धोखा देने के लिए क्या वेश धारण किया?इंद्र ने एक वृद्ध ब्राह्मण का वेश धारण करके कर्ण के पास पहुँचकर भिक्षा में उसके दिव्य कवच और कुंडल मांग लिए।#इंद्र#ब्राह्मण वेश#कर्ण
लोकदान करने से स्वर्ग मिलता है क्या?हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार गौ दान, तिल दान और भूमि दान स्वर्ग का द्वार खोलते हैं। ये दान सुपात्र ब्राह्मणों को देने से पाप नष्ट होते हैं।#दान#स्वर्ग#गौ दान
लोकस्वर्लोक कैसे मिलता है?स्वर्लोक धर्म पालन, दान (गौ, भूमि, तिल), यज्ञ और वैदिक अनुष्ठानों से मिलता है। मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से भी स्वर्ग की प्राप्ति होती है।#स्वर्लोक#प्राप्ति#यज्ञ
शिव पूजाशिव मंदिर में दान देने का शास्त्रीय विधान क्या है?अन्न दान सर्वश्रेष्ठ। अन्य: वस्त्र, धन, गो, पूजा सामग्री, विद्या दान। नियम: दाहिने हाथ से, श्रद्धापूर्वक, गुप्त रूप से, यथाशक्ति, सत्पात्र को। सोमवार/प्रदोष/शिवरात्रि विशेष फलदायी। उद्देश्य: सेवा भावना, बदले की अपेक्षा नहीं।#दान#मंदिर#शास्त्रीय विधान
ज्योतिष उपायराहु शांति के लिए दान क्या करें?काले तिल, नारियल(नदी प्रवाहित), काला कंबल, सरसों, लोहा, उड़द, छाया दान, मछली(नदी)। राहु काल में=विशेष। सबसे सरल: नारियल+तिल+उड़द।#राहु#दान#शांति
धर्म मार्गदर्शनदान से पापों का नाश कैसे होता है?गीता (17.20-22): सात्विक दान (निःस्वार्थ, पात्र को) = श्रेष्ठ, पापनाशक। अन्नदान सबसे बड़ा ('अन्नदानं परं दानम्')। दान से लोभ त्याग + पुण्य संचय + कर्म शुद्धि। दान = प्रायश्चित, पाप की छूट नहीं।#दान#पाप नाश#धर्म
विवाह संस्कारकन्यादान सबसे बड़ा दान क्यों?कन्या=देवी स्वरूप, सबसे प्रिय=सबसे बड़ा त्याग=सबसे बड़ा पुण्य। दो परिवार जोड़ती=सृष्टि दान। शास्त्रीय=सम्मान+विश्वास। आधुनिक: कन्या सहमति अनिवार्य=संबंध दान, सम्पत्ति नहीं।#कन्यादान#दान#विवाह
भक्ति एवं आध्यात्मदान कर रहे हैं पर दरिद्रता दूर नहीं हो रही — कारण क्या है?दान का फल तब अधिक होता है जब — बिना दिखावे के सही पात्र को, सात्विक भाव से दिया जाए (गीता 17.20)। प्रारब्ध कर्म का ऋण चुकाने में समय लगता है। दान के साथ परिश्रम और अनुशासन भी जरूरी है।#दान#दरिद्रता#कर्म
धर्म मार्गदर्शनप्रायश्चित कैसे करें पापों के लिए?प्रायश्चित: तप (उपवास/व्रत), जप (गायत्री/महामृत्युंजय), दान (अन्न/गो/वस्त्र), तीर्थ यात्रा, हवन, सेवा। सबसे महत्वपूर्ण: सच्चा पश्चाताप + पुनः पाप न करने का संकल्प। गीता: आत्मज्ञान और ईश्वर शरणागति सर्वोच्च प्रायश्चित।#प्रायश्चित#पाप क्षमा#तप
शिवभक्तिशिवभक्ति पाने के साधन कौन-कौन से हैं?ज्ञान, अध्यापन, होम, ध्यान, यज्ञ, तप, वेद, दान और अध्ययन शिवभक्ति प्राप्त करने के साधन बताए गए हैं।#शिवभक्ति#ज्ञान#अध्यापन
दान और साधुधर्मदान कितने प्रकार का बताया गया है?दान तीन प्रकार का बताया गया है: कनिष्ठ, मध्यम और श्रेष्ठ।#दान#कनिष्ठ दान#मध्यम दान
दान और साधुधर्मदान का सही लक्षण क्या है?न्यायपूर्वक अर्जित प्रिय द्रव्य को गुणी पात्र को देना दान का लक्षण है।#दान#न्यायपूर्वक धन#गुणी पात्र
श्रीमद्भागवततपस्या और दान का असली फल क्या है?तपस्या और दान का असली फल श्रीकृष्ण के गुण और लीला का वर्णन करना बताया गया है।#तपस्या#दान#कृष्ण गुण
श्रीमद्भागवतभागवत सप्ताह में बारह ब्राह्मणों को भोजन क्यों कराएं?समापन पर बारह ब्राह्मणों को खीर, मधु आदि उत्तम पदार्थ खिलाकर व्रत की पूर्ति और दान का विधान बताया गया है।#ब्राह्मण भोजन#बारह ब्राह्मण#व्रतपूर्ति
श्रीमद्भागवतभागवत सप्ताह के बाद दान किसे दें?समाप्ति पर ब्राह्मणों और याचकों को धन-अन्न दें; सामर्थ्य हो तो हवन सामग्री, गौ-सुवर्ण और भागवत पुस्तक आचार्य को दें।#दान#भागवत सप्ताह#ब्राह्मण
श्रीमद्भागवतभागवत सप्ताह का उद्यापन कैसे करें?उद्यापन में पुस्तक-वक्ता पूजा, प्रसाद-तुलसी, कीर्तन, जय-शंखध्वनि, दान, गीता पाठ या हवन, ब्राह्मण भोजन और पुस्तक दान बताए गए हैं।#उद्यापन#भागवत सप्ताह#दान
कर्म फलनरक और कर्मानुसार दंड का वर्णन किसके साथ आता है?नरक और कर्मानुसार दंड का वर्णन स्वर्ग-नरक, दान, यमपुरी, पंचाक्षर मन्त्र और रुद्रमाहात्म्य के साथ आता है।#नरक#कर्मानुसार दंड#स्वर्ग
श्रीमद्भागवतपुत्र के लिए आत्मदेव ने क्या दान किया?आत्मदेव ने पुत्र के लिये पुण्यकर्म किए और दीन-दुखियों को गौ, भूमि, सोना और वस्त्र दान किए।#आत्मदेव#दान#संतान
लोकआधी रोटी बांटने का धार्मिक महत्व क्या है?कम में भी बाँटना करुणा और धर्म का बड़ा रूप है।#दान#भोजन#अतिथि
लोकगरीब का दान बड़ा क्यों माना जाता है?अभाव में दिया गया दान सबसे अधिक निस्वार्थ माना गया है।#दान#गरीब#माधव
लोकलक्ष्मी जी असुरराज बलि के पास क्यों गईं?लक्ष्मी जी बलि की सत्यनिष्ठा और दानशीलता से प्रसन्न होकर उसके पास गईं।#लक्ष्मी#राजा बलि#धर्म
लोकएकादशी श्राद्ध में ब्राह्मण कौन होना चाहिए?सुयोग्य, वेदमर्मज्ञ और शीलवान ब्राह्मण।#सुयोग्य ब्राह्मण#श्राद्ध भोजन#दान
लोकएकादशी श्राद्ध से यममार्ग में क्या लाभ है?यममार्ग की बाधाएं कम होती हैं।#यममार्ग#एकादशी श्राद्ध#दान
लोकयममार्ग में दान कैसे मदद करता है?दान जीव की पारलौकिक यात्रा आसान करते हैं।#यममार्ग#दान#गरुड़ पुराण
लोकएकादशी श्राद्ध में दान क्या करें?दक्षिणा, गोदान, वस्त्र, पादुका, छत्र आदि।#दान#एकादशी श्राद्ध#गरुड़ पुराण
लोकअष्टमी श्राद्ध में तांबे का दान क्यों करते हैं?तांबा पितरों को शीतलता देता है।#तांबा#दान#अष्टमी श्राद्ध
लोकपुण्यात्माओं को यमराज का सौम्य रूप क्यों दिखाई देता है?सत्य, धर्म, दान और अहिंसा का पालन करने वाली पुण्यात्मा को यमराज शांत, सौम्य और देव रूप में दिखाई देते हैं।#यमराज सौम्य रूप#पुण्यात्मा#धर्म
लोककौन से कर्म वितल लोक की प्राप्ति कराते हैं?सकाम पुण्य, दान और भौतिक सफलता की इच्छा, लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान की कमी, वितल लोक की प्राप्ति करा सकती है।#वितल कर्म#सकाम कर्म#दान
लोकभगवान वामन ने तीन पग भूमि क्यों मांगी?भगवान वामन ने तीन पग भूमि मांगकर बलि की सत्यनिष्ठा, दानवीरता और आत्म-समर्पण को प्रकट किया।#तीन पग भूमि#वामन अवतार#राजा बलि
लोकतपस्या और दान करने पर भी कोई तलातल क्यों प्राप्त करता है?यदि तपस्या और दान का उद्देश्य ईश्वर प्राप्ति नहीं बल्कि भोग और शक्ति हो, तो तलातल की प्राप्ति हो सकती है।#तपस्या#दान#तलातल
लोककौन से कर्म तलातल लोक की प्राप्ति कराते हैं?भौतिक सुख, शक्ति, ऐश्वर्य, तंत्र-मंत्र और माया के दुरुपयोग से प्रेरित कर्म तलातल की प्राप्ति कराते हैं।#तलातल प्राप्ति#कर्म#तपस्या
मरणोपरांत आत्मा यात्रादान को पारलौकिक यात्रा का पाथेय क्यों कहा गया है?दान आत्मा की यात्रा में वैतरणी पार कराने, पाप नाश, रक्षा और परलोक सुख देने वाला साधन माना गया है।#दान#पाथेय#पारलौकिक यात्रा
मरणोपरांत आत्मा यात्राभूमि दान नरक से कैसे बचाता है?भूमि दान नरक की यातनाओं से पूर्ण रक्षा करने वाला माना गया है।#भूमि दान#नरक#दान
मरणोपरांत आत्मा यात्राधान्य दान का परलोक में क्या फल है?धान्य दान परलोक में सुख-समृद्धि प्रदान करता है।#धान्य दान#परलोक#सुख समृद्धि
मरणोपरांत आत्मा यात्रास्वर्ण दान का परलोक में क्या फल है?स्वर्ण दान परलोक में सुख-समृद्धि देने वाला माना गया है।#स्वर्ण दान#परलोक#सुख समृद्धि
मरणोपरांत आत्मा यात्राकपास दान किससे रक्षा करता है?कपास दान भूतों और पिशाचों के खतरे से रक्षा करता है।#कपास दान#भूत#पिशाच
मरणोपरांत आत्मा यात्रालौह दान का क्या महत्व है?लौह दान यमराज को प्रसन्न करने वाला दान माना गया है।#लौह दान#लोहा दान#यमराज
मरणोपरांत आत्मा यात्रालवण दान का क्या महत्व है?लवण दान यमराज को प्रसन्न करने वाला माना गया है।#लवण दान#नमक दान#यमराज
मरणोपरांत आत्मा यात्रातिल भगवान विष्णु से कैसे जुड़ा है?तिल भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न माने गए हैं।#तिल#भगवान विष्णु#दान
मरणोपरांत आत्मा यात्रासूतक काल में दान, जप और हवन क्यों वर्जित हैं?दान, जप और हवन सूतक में इसलिए वर्जित हैं ताकि ध्यान प्रेत की सद्गति पर रहे।#सूतक काल#दान#जप
दान विधानरथ सप्तमी के दिन क्या दान करना सबसे शुभ होता है?इस दिन तांबे के बर्तन में 'तिल' रखकर दान करना सबसे अच्छा माना जाता है। अज्ञानता मिटाने के लिए घी का दीप-दान करना चाहिए। इसके अलावा लाल कपड़े, गुड़ और अन्न का दान करना चाहिए।#दान#तिल#दीप दान
उद्यापन और दानशनिवार को क्या दान करना चाहिए और 'छाया दान' क्या है?शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल, लोहा, काला कपड़ा और उड़द की दाल दान करनी चाहिए। कांसे की कटोरी में तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखकर दान करने को 'छाया दान' कहते हैं, जिससे रोग दूर होते हैं।#दान#छाया दान#काले तिल
जीवन एवं मृत्युप्रेतकल्प में दान का वर्णन क्यों किया गया है?प्रेतकल्प में दान का वर्णन — प्रेत-मुक्ति का साधन बताने के लिए, जीवन में दान की प्रेरणा के लिए, परिजनों का कर्तव्य-बोध कराने के लिए और यमलोक में दान की वास्तविकता सिद्ध करने के लिए।#प्रेतकल्प#दान#कारण
जीवन एवं मृत्युदान का फल कैसे घटता है?दान का फल घटता है — अहंकार और दिखावे से, अपात्र को देने से, दान के बाद पछताने से, प्रतिफल की आशा से और दान का बखान करने से। 'सात्विक दान' ही अक्षय है।#दान#फल#कमी
जीवन एवं मृत्युदान का फल कैसे बढ़ता है?दान का फल बढ़ता है — पुण्यकाल (ग्रहण, संक्रांति, पितृपक्ष) में, तीर्थ में (एक गाय = एक लाख का फल), मृत्युकाल में (हजारगुना), सत्पात्र को और श्रद्धापूर्वक देने से।#दान#फल#पुण्यकाल
जीवन एवं मृत्युदान का फल किस प्रकार मिलता है?दान का फल मिलने के तरीके — यममार्ग पर दान 'आगे-आगे उपस्थित होता है', कर्म के रूप में जीव के साथ जाता है, सूक्ष्म रूप में पितरों तक पहुँचता है, तत्काल और अक्षय है। पुण्यकाल में गुणित होता है।#दान#फल#कर्म नियम
जीवन एवं मृत्युदान का प्रभाव मोक्ष में कैसे पड़ता है?दान का मोक्ष में प्रभाव — दान स्वर्ग का मार्ग खोलता है, दान + भक्ति + ज्ञान मोक्ष की ओर ले जाते हैं। वृषोत्सर्ग और गोदान से पितर यमलोक से मुक्त होते हैं। 'आत्म-ज्ञान और परमात्मा-शरण' अंतिम मोक्ष है।#दान#मोक्ष#भक्ति