विस्तृत उत्तर
दानचंद्रिका' के अनुसार शनि शांति के लिए काले तिल (पितृ और शनि को प्रिय), सरसों का तेल (शनि की शुष्कता कम करने हेतु), लोहा (शनि के भार को कम करने हेतु), काला वस्त्र और काली उड़द का दान करना चाहिए। 'भविष्य पुराण' में 'छाया दान' का विशेष महत्व बताया गया है। इसकी विधि में एक कांसे या लोहे की कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा (छाया) देखना होता है और एक सिक्का डालकर उसे डाकोत या मंदिर में दान कर दिया जाता है। इसका तर्क यह है कि ऐसा करने से व्यक्ति के ऊपर मंडरा रहे अरिष्ट और रोग उस तेल में समाहित हो जाते हैं।





