📖
विस्तृत उत्तर
तिल को साक्षात भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न माना गया है। इसलिए तिल को पवित्र, दिव्य और पितृकर्म के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है। पद्म पुराण और ब्रह्मांड पुराण में तिल को दिव्य औषधि कहा गया है। पितृ तर्पण में काले तिल जल के साथ मिलाकर अर्पित किए जाते हैं, जिससे पितरों की तृप्ति और अशुभ शक्तियों की निवृत्ति मानी जाती है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?

