विस्तृत उत्तर
व्रतराज' और 'कर्मकांड' के अनुसार, 21 मंगलवार पूर्ण होने पर 22वें मंगलवार को विधिवत उद्यापन करना अनिवार्य है। 22वें मंगलवार को भी पूर्ववत पूजा करें और हनुमान जी को चोला, जनेऊ और फलों की माला अर्पित करें। उद्यापन का मुख्य अंग हवन है। एक पवित्र स्थान पर हवन कुंड बनाकर 'ॐ हं हनुमते नमः' या 'ॐ रामदूताय स्वाहा' मंत्र से आहुति दें। शुद्ध घी, काला तिल, जौ, और गुड़ मिश्रित हवन सामग्री का प्रयोग करें और कम से कम 108 आहुतियां दें। गुड़ की आहुति हनुमान जी को विशेष प्रिय है।



