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मंत्र जप विधि📜 मंत्र शास्त्र, अनुष्ठान पद्धति1 मिनट पठन

पुरश्चरण में जप-हवन-तर्पण-मार्जन का क्या क्रम है?

संक्षिप्त उत्तर

5 अंग: जप(मूल)→हवन(÷10)→तर्पण(÷10)→मार्जन(÷10)→भोजन/दान(÷10)। सवा लाख: 1,25,000→12,500→1,250→125→~13। पुरश्चरण = मंत्र सिद्धि — बिना = अपूर्ण।

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विस्तृत उत्तर

पुरश्चरण = मंत्र सिद्धि का सम्पूर्ण अनुष्ठान:

5 अंग (क्रम)

| क्रम | कर्म | अनुपात | उदाहरण (सवा लाख) |

|------|------|---------|--------------------|

| 1 | जप | मूल | 1,25,000 |

| 2 | हवन | जप ÷ 10 | 12,500 आहुति |

| 3 | तर्पण | हवन ÷ 10 | 1,250 तर्पण |

| 4 | मार्जन | तर्पण ÷ 10 | 125 मार्जन |

| 5 | ब्राह्मण भोजन/दान | मार्जन ÷ 10 | ~12-13 |

विधि

  • हवन: मंत्र + 'स्वाहा' + घी + सामग्री → अग्नि।
  • तर्पण: मंत्र + 'तर्पयामि' + अंजलि जल → पात्र/नदी।
  • मार्जन: मंत्र + कुश जल छिड़काव → शरीर/स्थान।
  • भोजन: ब्राह्मण/कन्या/गरीब + दक्षिणा + दान।

पुरश्चरण = मंत्र सिद्धि। बिना पुरश्चरण = मंत्र 'अपूर्ण'।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र, अनुष्ठान पद्धति
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