विस्तृत उत्तर
पुरश्चरण = मंत्र सिद्धि का सम्पूर्ण अनुष्ठान:
5 अंग (क्रम)
| क्रम | कर्म | अनुपात | उदाहरण (सवा लाख) |
|------|------|---------|--------------------|
| 1 | जप | मूल | 1,25,000 |
| 2 | हवन | जप ÷ 10 | 12,500 आहुति |
| 3 | तर्पण | हवन ÷ 10 | 1,250 तर्पण |
| 4 | मार्जन | तर्पण ÷ 10 | 125 मार्जन |
| 5 | ब्राह्मण भोजन/दान | मार्जन ÷ 10 | ~12-13 |
विधि
- ▸हवन: मंत्र + 'स्वाहा' + घी + सामग्री → अग्नि।
- ▸तर्पण: मंत्र + 'तर्पयामि' + अंजलि जल → पात्र/नदी।
- ▸मार्जन: मंत्र + कुश जल छिड़काव → शरीर/स्थान।
- ▸भोजन: ब्राह्मण/कन्या/गरीब + दक्षिणा + दान।
पुरश्चरण = मंत्र सिद्धि। बिना पुरश्चरण = मंत्र 'अपूर्ण'।





