विस्तृत उत्तर
उद्यापन = अनुष्ठान/व्रत पूर्ण होने पर समापन कर्म:
विधि (सवा लाख जप पूर्ण बाद)
- 1हवन: दशांश (जप का 1/10) आहुति — मंत्र + 'स्वाहा' + घी।
- 2तर्पण: हवन का 1/10 — मंत्र + जल अर्पण।
- 3मार्जन: तर्पण का 1/10 — मंत्र + जल छिड़काव।
- 4ब्राह्मण/कन्या भोजन: 5/7/9/11 ब्राह्मण या कन्या।
- 5दक्षिणा: यथाशक्ति।
- 6दान: वस्त्र, अन्न, फल, धन।
- 7देवता विसर्जन (यदि विशेष स्थापना): प्रतिमा/यंत्र नदी या यथास्थान।
- 8क्षमा प्रार्थना: अनुष्ठान में हुई त्रुटियों हेतु।
सरल उद्यापन: हवन (108 आहुति) + ब्राह्मण भोजन + दान = पर्याप्त।





