विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म में किसी भी सकाम अनुष्ठान या विशेष मंत्र जप से पहले संकल्प लेना अनिवार्य है। संकल्प का अर्थ है अपनी इच्छा, समय और लक्ष्य को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के सामने स्पष्ट रूप से घोषित करना। बिना संकल्प के किया गया जप दिशाहीन माना जाता है।
संकल्प लेने की विधि अत्यंत सरल है। दाएं हाथ (Right Hand) की हथेली में थोड़ा सा जल, अक्षत (साबुत चावल), पुष्प और कुछ द्रव्य (सिक्का) रखें। इसके बाद अपना नाम, अपने गोत्र का नाम, वर्तमान तिथि, वार (दिन), स्थान (जिस शहर/तीर्थ में हैं) और अपनी मनोकामना का स्पष्ट उच्चारण करें। अंत में यह कहें कि 'मैं इस कार्य की सिद्धि हेतु अमुक मंत्र का इतने दिनों तक इतनी संख्या में जप करने का संकल्प लेता हूँ।' इसके बाद हाथ का जल भगवान की मूर्ति के सामने या किसी पात्र में छोड़ दें और अपनी साधना आरंभ करें।





