विस्तृत उत्तर
यह प्रश्न बहुत व्यावहारिक है और इसका उत्तर उद्देश्य और परंपरा दोनों को देखकर दिया जा सकता है।
मिट्टी का दीपक:
शास्त्रीय श्रेष्ठता — हिंदू शास्त्रों में मिट्टी के दीपक को समस्त पूजाओं के लिए सबसे पवित्र और सार्वभौमिक माना गया है। यह पृथ्वी तत्व से बना है और सभी देवी-देवताओं को प्रिय है।
ग्रह संबंध — मिट्टी के दीपक से शनि और मंगल ग्रह की कृपा प्राप्त होती है।
नियम — एक बार जलाए गए मिट्टी के दीपक को दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिए। पूजा के बाद उसे बहते जल में प्रवाहित कर दें।
विशेष उपयोग — दीपावली और सभी महत्वपूर्ण पर्वों पर मिट्टी के दीपक ही सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं।
पीतल का दीपक:
नित्य पूजा के लिए उत्तम — पीतल के दीपक को एक बार लाकर बार-बार उपयोग किया जा सकता है, इसलिए यह घर के मंदिर में नित्य पूजा के लिए व्यावहारिक और प्रचलित है।
टिकाऊपन — पीतल की धातु लंबे समय तक टिकती है और अखंड ज्योत के लिए उपयुक्त है।
ग्रह संबंध — पीतल को बृहस्पति (गुरु) से संबंधित माना जाता है — जो ज्ञान, धन और शुभता का कारक है।
निष्कर्ष:
साधारण नित्य पूजा के लिए — पीतल का दीपक सुविधाजनक और उचित है।
त्योहारों, विशेष अनुष्ठानों और देवताओं को समर्पित विशेष पूजाओं के लिए — मिट्टी का दीपक शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ है।
दोनों की तुलना में — शास्त्रीय दृष्टि से मिट्टी का दीपक सर्वाधिक पवित्र माना गया है। किंतु पीतल का दीपक नित्य उपयोग के लिए उत्तम है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दीपक चाहे किसी भी धातु का हो — उसमें जो श्रद्धा और भाव होता है, वही उसकी सच्ची शक्ति है।





