विस्तृत उत्तर
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'संकटमोचन हनुमान अष्टक' (बाल समय रबि भक्षि लियो तब...) हनुमान जी की एक ऐसी स्तुति है, जो त्वरित गति से जीवन के जटिल संकटों को दूर करती है।
इस पाठ को पढ़ने के लिए वैसे तो कोई भी समय शुभ है, लेकिन शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार इसका पाठ तब सबसे अधिक प्रभावशाली होता है जब साधक गहरे संकट या मानसिक पीड़ा में हो। नियमित पाठ के लिए संध्या काल (सूर्यास्त के बाद का समय) या रात्रि का समय सबसे उपयुक्त माना गया है। विशेष रूप से मंगलवार या शनिवार की रात को हनुमान जी की प्रतिमा के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाकर इसके 7 या 11 पाठ करने से बड़े से बड़ा कोर्ट केस, बीमारी या शत्रु की बाधा टल जाती है।





