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पूजा विधान⏱ 1 मिनट पठन

धूमावती साधना में न्यास कैसे करते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

धूमावती न्यास: पिप्पलाद ऋषि = शिर में। त्रिव्रत् छंद = मुख में। श्री ज्येष्ठा धूमावती देवता = हृदय में।

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विस्तृत उत्तर

धूमावती साधना में न्यास की विधि:

संकल्प और विनियोग के बाद न्यास किया जाता है, जिसमें:

— पिप्पलाद ऋषि को शिर में।

— त्रिव्रत् छंद को मुख में।

— श्री ज्येष्ठा धूमावती देवता को हृदय में।

इस प्रकार न्यास संपन्न किया जाता है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

धूमावती साधना में न्यास कैसे करते हैं को संदर्भ सहित समझें

धूमावती साधना में न्यास कैसे करते हैं का सबसे सीधा सार यह है: धूमावती न्यास: पिप्पलाद ऋषि = शिर में। त्रिव्रत् छंद = मुख में। श्री ज्येष्ठा धूमावती देवता = हृदय में।

पूजा विधान जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।

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यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

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