का सरल उत्तर
धूमावती न्यास: पिप्पलाद ऋषि = शिर में। त्रिव्रत् छंद = मुख में। श्री ज्येष्ठा धूमावती देवता = हृदय में।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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