विस्तृत उत्तर
श्री विद्या साधना की विधि:
— साधक को उपयुक्त आसन (जैसे सिद्धासन, पद्मासन या स्वास्तिकासन) में बैठें।
— मेरुदंड सीधा रखें।
— दृष्टि को नासिकाग्र या भ्रूमध्य पर केंद्रित करें।
— साधना का प्रारंभ गुरु ध्यान, गणपति पूजन और भैरव पूजन से करें।
— देवी का आवाहन (प्रायः सुपारी में प्रतिष्ठित कर) करें।
— पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजन संपन्न करें।
— कमल गट्टे की माला या स्फटिक माला से निर्दिष्ट मंत्र का (जैसे 108 बार या गुरु द्वारा बताई गई संख्या में) जाप करें।
पूजा में आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और ताम्बूल आदि उपचार शामिल होते हैं। न्यास, मुद्राएँ और विशेष मंत्रों का पाठ भी इसका अभिन्न अंग है।
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