मंत्र जप विधिमंत्र जप पूर्ण होने पर उद्यापन कैसे करें?हवन (दशांश) → तर्पण (1/10) → मार्जन (1/10) → ब्राह्मण/कन्या भोजन → दक्षिणा → दान → क्षमा। सरल: 108 हवन + भोजन + दान।#उद्यापन#पूर्ण#अनुष्ठान
ध्यान साधनाध्यान के बाद क्या करना चाहिए?तुरंत न उठें (1-2 मिनट), हथेलियां→आंखें, 'ॐ शांतिः', जल, diary (अनुभव लिखें), grounding, 5 मिनट transition। न करें: तुरंत फोन/भोजन/TV। Gentle।#ध्यान#बाद#क्या
तंत्र शास्त्रतंत्र में पूर्णाहुति का क्या अर्थ है?पूर्णाहुति = हवन की अंतिम/सम्पूर्ण आहुति। नारियल+घी+खीर+मेवे = एक साथ। मंत्र: 'ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं...' (ईशावास्य) + 'स्वाहा'। अर्थ: सर्वसमर्पण ('इदं न मम')। बिना पूर्णाहुति = हवन अपूर्ण।#पूर्णाहुति#हवन#समापन
पूजा विधिपूजा के बाद क्या करना चाहिए?पूजा के बाद: क्षमा प्रार्थना ('आवाहनं न जानामि...'), प्रदक्षिणा, साष्टांग प्रणाम, प्रसाद ग्रहण, चरणामृत। कुछ क्षण शांत बैठें। फिर दैनिक कार्य — भगवान का स्मरण बनाए रखें। बासी फूल हटाएं, मंदिर व्यवस्थित करें।#पूजा बाद#प्रसाद#क्षमा
मंत्र जप विधिसवा लाख जप करने के बाद हवन-तर्पण-मार्जन कैसे करें?हवन: 12,500 (या 108 सरल) + 'स्वाहा' + घी। तर्पण: 1,250 (या 11) + जल। मार्जन: 125 (या 3) + कुश जल। ब्राह्मण भोजन + दान + क्षमा। पूर्णाहुति: नारियल।#सवा लाख#हवन#तर्पण
गायत्री साधनागायत्री मंत्र जप के बाद दशांश हवन कैसे करें?12,500 आहुति (या 1,008/108 व्यावहारिक)। गायत्री मंत्र + 'स्वाहा' + घी + तिल/जौ। पूर्णाहुति: नारियल+घी+गुड़+मेवा। शांति पाठ। आम समिधा, गुगल, चंदन।#गायत्री#दशांश#हवन