विस्तृत उत्तर
पूर्णाहुति = हवन/होम की अंतिम (समापन) आहुति — सबसे महत्वपूर्ण:
'पूर्ण' + 'आहुति' = पूर्ण (सम्पूर्ण) अर्पण।
विधि
- 1सभी मंत्र आहुतियां पूर्ण होने पर।
- 2विशेष सामग्री: नारियल (श्रीफल), घी, खीर, मेवे, फल — सब एक साथ अग्नि में।
- 3पूर्णाहुति मंत्र: 'ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।' (ईशावास्योपनिषद) + 'स्वाहा'।
- 4स्वाहा: 'इदं न मम' — यह मेरा नहीं (पूर्ण समर्पण)।
अर्थ
- ▸'वह (ब्रह्म) पूर्ण है, यह (सृष्टि) पूर्ण है। पूर्ण से पूर्ण उत्पन्न। पूर्ण से पूर्ण लेने पर भी पूर्ण ही शेष।'
- ▸अनुष्ठान का सम्पूर्ण फल ईश्वर को समर्पित = 'इदं न मम'।
महत्व: बिना पूर्णाहुति = हवन अपूर्ण। यही सबसे शक्तिशाली क्षण — सर्वसमर्पण।