विस्तृत उत्तर
यंत्र = देवता शक्ति का ज्यामितीय (geometric) प्रतीक। जैसे मूर्ति = देवता का साकार रूप, वैसे यंत्र = देवता का सूक्ष्म/गणितीय रूप।
महत्व
- 1ऊर्जा केंद्रीकरण: यंत्र की ज्यामिति विशिष्ट ऊर्जा पैटर्न बनाती है — ब्रह्मांडीय ऊर्जा केंद्रित।
- 2देवता निवास: प्राण प्रतिष्ठित यंत्र = देवता का निवास स्थान।
- 3मंत्र + यंत्र = पूर्ण साधना: मंत्र = ध्वनि, यंत्र = रूप, तंत्र = विधि — तीनों मिलकर पूर्ण।
- 4ध्यान सहायक: यंत्र पर त्राटक (एकटक दृष्टि) = गहन ध्यान।
- 5स्थायी: मूर्ति के विपरीत यंत्र सदा शुद्ध — धातु/स्फटिक पर अंकित।
तंत्रसार: 'मन्त्रे तन्त्रे तथा यन्त्रे देवता एव प्रतिष्ठिता' — मंत्र, तंत्र और यंत्र में देवता प्रतिष्ठित।
प्रमुख यंत्र: श्री यंत्र (ललिता), महामृत्युंजय यंत्र (शिव), काली यंत्र, गणेश यंत्र, सुदर्शन यंत्र, नवग्रह यंत्र।


