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तंत्र शास्त्र📜 पतंजलि योग सूत्र, तंत्र शास्त्र, हठ योग प्रदीपिका1 मिनट पठन

तंत्र और योग में क्या संबंध है?

संक्षिप्त उत्तर

गहन संबंध: कुण्डलिनी योग=तंत्र योग, मंत्र योग=तंत्र, न्यास=ऊर्जा स्थापना, ध्यान+प्राणायाम दोनों में। भेद: योग=त्याग/निरोध, तंत्र=भोग से योग। पूरक — तंत्र योग=कुण्डलिनी=हठ=एक परिवार।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र और योग = गहन संबंध — दोनों एक ही लक्ष्य (मोक्ष/ईश्वर प्राप्ति) के भिन्न मार्ग:

संबंध

  1. 1कुण्डलिनी योग = तंत्र योग: कुण्डलिनी जागरण (7 चक्र, इडा-पिंगला-सुषुम्ना) = तंत्र का मूल सिद्धांत। हठ योग प्रदीपिका = तांत्रिक ग्रंथ।
  2. 2मंत्र योग: पतंजलि: 'तज्जपस्तदर्थभावनम्' — मंत्र जप = योग। तंत्र = मंत्र विद्या।
  3. 3न्यास = आसन/प्राणायाम: शरीर में ऊर्जा स्थापना = दोनों में।
  4. 4ध्यान: तंत्र + योग = दोनों ध्यान प्रधान।
  5. 5प्राणायाम: तंत्र में प्राणायाम = मंत्र शक्ति वर्धक।

भेद

  • योग (पतंजलि): 'निरोध' (वृत्ति रोकना) — त्याग प्रधान।
  • तंत्र: 'भोग से योग' — संसार का उपयोग मोक्ष हेतु।
  • योग = अष्टांग (यम, नियम, आसन...)। तंत्र = मंत्र, यंत्र, न्यास, पूजा।

सार: तंत्र ≠ योग विरोधी — पूरक। तंत्र योग = कुण्डलिनी योग = हठ योग = एक ही परिवार।

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शास्त्रीय स्रोत
पतंजलि योग सूत्र, तंत्र शास्त्र, हठ योग प्रदीपिका
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