तंत्र और योग में क्या संबंध है?
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गहन संबंध: कुण्डलिनी योग=तंत्र योग, मंत्र योग=तंत्र, न्यास=ऊर्जा स्थापना, ध्यान+प्राणायाम दोनों में। भेद: योग=त्याग/निरोध, तंत्र=भोग से योग। पूरक — तंत्र योग=कुण्डलिनी=हठ=एक परिवार।
- 1कुण्डलिनी योग = तंत्र योग: कुण्डलिनी जागरण (7 चक्र, इडा-पिंगला-सुषुम्ना) = तंत्र का मूल सिद्धांत। हठ योग प्रदीपिका = तांत्रिक ग्रंथ।
- 2मंत्र योग: पतंजलि: 'तज्जपस्तदर्थभावनम्' — मंत्र जप = योग। तंत्र = मंत्र विद्या।
- 3न्यास = आसन/प्राणायाम: शरीर में ऊर्जा स्थापना = दोनों में।
- 4ध्यान: तंत्र + योग = दोनों ध्यान प्रधान।
- 5प्राणायाम: तंत्र में प्राणायाम = मंत्र शक्ति वर्धक।
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तंत्र शास्त्र
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