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तंत्र शास्त्र📜 शाक्त आगम, आगम-कल्पद्रुम, कुलार्णव तंत्र1 मिनट पठन

तंत्र साधना में महिलाओं का क्या स्थान है?

संक्षिप्त उत्तर

आगम-कल्पद्रुम: 'स्त्री दीक्षा शुभ, माता = 8 गुना फलदायी।' शाक्त: देवी=ब्रह्म, स्त्री=शक्ति रूप। तंत्र=लिंग भेद नहीं। स्त्री गुरु=विशेष सम्मानित। 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।' तंत्र=एकमात्र शास्त्र — स्त्री सर्वोच्च।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र शास्त्र = एकमात्र शास्त्र जहां स्त्री को सर्वोच्च स्थान:

शास्त्रीय प्रमाण

  1. 1आगम-कल्पद्रुम: 'स्त्रियो दीक्षा शुभा प्रोक्ता मातुश्चाष्टगुणाः स्मृताः' — स्त्री से दीक्षा शुभ, माता से 8 गुना फलदायी।
  2. 2शाक्त तंत्र: देवी = परब्रह्म। स्त्री = शक्ति का भौतिक रूप। स्त्री का अपमान = शक्ति का अपमान।
  3. 3कुलार्णव तंत्र: तंत्र में जातिगत/लिंगगत भेदभाव नहीं — सभी अधिकारी।
  4. 4प्रभात खबर रिपोर्ट (2024): 'तंत्र दीक्षा में 10 में से 8 गुरु महिला' — पूर्वोत्तर भारत में आज भी।

स्त्री का स्थान

  • गुरु: स्त्री गुरु = विशेष सम्मानित (माता = सर्वश्रेष्ठ गुरु)।
  • साधिका: स्त्री साधक = पुरुष के समकक्ष, कुछ मतों में श्रेष्ठ।
  • शक्ति स्वरूप: चक्रपूजा में स्त्री = शक्ति प्रतीक — पूजनीय।
  • 64 योगिनी: स्त्री शक्ति = तांत्रिक साधना का आधार।

मनुस्मृति: 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता' — जहां नारी पूजित, वहां देवता।

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शास्त्रीय स्रोत
शाक्त आगम, आगम-कल्पद्रुम, कुलार्णव तंत्र
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