विस्तृत उत्तर
तंत्र विद्या = आजीवन यात्रा — कोई 'कोर्स' नहीं:
चरणबद्ध
- 1प्रारंभ (1-3 वर्ष): दीक्षा, मूल मंत्र जप, नित्य पूजा, शुद्धि, अनुशासन।
- 2मध्यम (3-12 वर्ष): पुरश्चरण, विशेष अनुष्ठान, न्यास, यंत्र पूजा, हवन विधि।
- 3उन्नत (12+ वर्ष): मंत्र सिद्धि, उच्च साधनाएं, शक्तिपात क्षमता।
- 4सिद्ध (जीवन भर): पूर्ण ज्ञान = आजीवन — 'सीखना कभी समाप्त नहीं।'
कारक: गुरु कृपा (सबसे महत्वपूर्ण), साधक योग्यता, पूर्व जन्म संस्कार, नियमितता, समर्पण।
सत्य: '12 वर्ष = एक साधना चक्र' — कई परंपराओं में। परंतु गुरु कृपा से शीघ्र भी संभव।
सावधानी: '7 दिन में तंत्र सीखें' / '21 दिन सिद्धि' = ठगी। कोई भी गंभीर विद्या इतनी जल्दी नहीं आती।

