विस्तृत उत्तर
तंत्र शास्त्र में दीक्षा = मंत्र/साधना में प्रवेश का द्वार। गुरु शिष्य को दीक्षित कर मंत्र में प्राण (चैतन्य) डालते हैं।
दीक्षा के प्रमुख प्रकार
1क्रिया (बाह्य) दीक्षा
- ▸होम, अभिषेक, पूजा आदि बाह्य क्रियाओं द्वारा।
- ▸पृथ्वी और जल तत्व आधारित।
- ▸सबसे स्थूल प्रकार।
2आंतरिक (वैध) दीक्षा — 4 उपभेद
- ▸चाक्षुषी दीक्षा: गुरु की दृष्टि (नेत्र) मात्र से — तेज तत्व। शंकराचार्य ने हस्तामलक को दृष्टि से दीक्षित किया।
- ▸स्पर्श दीक्षा: गुरु के स्पर्श (हाथ/मस्तक) से — वायु तत्व। रामकृष्ण परमहंस ने विवेकानंद को स्पर्श से।
- ▸शब्द/मंत्र दीक्षा: गुरु कान में मंत्र कहें — आकाश तत्व। सबसे प्रचलित।
- ▸ध्यान/मानसिक दीक्षा: गुरु मन से शक्ति प्रेषित — सर्वसूक्ष्म, सर्वश्रेष्ठ।
3शक्तिपात दीक्षा
- ▸गुरु अपनी शक्ति (कुण्डलिनी) शिष्य में प्रेषित।
- ▸सबसे शक्तिशाली — तत्काल कुण्डलिनी जागरण संभव।
- ▸दूर से भी संभव (संकल्प शक्ति)।
4. स्वप्न दीक्षा: गुरु/देवता स्वप्न में मंत्र दें — दुर्लभ।
तंत्रसार: 'दीयते ज्ञानं क्षीयते पापम् — दीक्षा' = ज्ञान दिया जाए, पाप क्षीण हो = दीक्षा।
ध्यान रखें: तांत्रिक दीक्षा = अत्यंत गोपनीय। बिना दीक्षा तांत्रिक मंत्र = निष्फल/हानिकारक।


