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तंत्र शास्त्र📜 शाक्त आगम, तंत्रसार, कामिकागम, शैव तंत्र2 मिनट पठन

तंत्र शास्त्र में दीक्षा कितने प्रकार की होती है?

संक्षिप्त उत्तर

प्रमुख: (1) क्रिया (बाह्य — होम/अभिषेक)। (2) चाक्षुषी (दृष्टि)। (3) स्पर्श (हाथ/मस्तक)। (4) शब्द/मंत्र (कान में — सर्वाधिक प्रचलित)। (5) ध्यान/मानसिक (सर्वसूक्ष्म)। (6) शक्तिपात (शक्ति प्रेषण — सर्वशक्तिमान)। (7) स्वप्न (दुर्लभ)। तंत्रसार: 'ज्ञान दे, पाप क्षीण करे = दीक्षा।'

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विस्तृत उत्तर

तंत्र शास्त्र में दीक्षा = मंत्र/साधना में प्रवेश का द्वार। गुरु शिष्य को दीक्षित कर मंत्र में प्राण (चैतन्य) डालते हैं।

दीक्षा के प्रमुख प्रकार

1क्रिया (बाह्य) दीक्षा

  • होम, अभिषेक, पूजा आदि बाह्य क्रियाओं द्वारा।
  • पृथ्वी और जल तत्व आधारित।
  • सबसे स्थूल प्रकार।

2आंतरिक (वैध) दीक्षा — 4 उपभेद

  • चाक्षुषी दीक्षा: गुरु की दृष्टि (नेत्र) मात्र से — तेज तत्व। शंकराचार्य ने हस्तामलक को दृष्टि से दीक्षित किया।
  • स्पर्श दीक्षा: गुरु के स्पर्श (हाथ/मस्तक) से — वायु तत्व। रामकृष्ण परमहंस ने विवेकानंद को स्पर्श से।
  • शब्द/मंत्र दीक्षा: गुरु कान में मंत्र कहें — आकाश तत्व। सबसे प्रचलित।
  • ध्यान/मानसिक दीक्षा: गुरु मन से शक्ति प्रेषित — सर्वसूक्ष्म, सर्वश्रेष्ठ।

3शक्तिपात दीक्षा

  • गुरु अपनी शक्ति (कुण्डलिनी) शिष्य में प्रेषित।
  • सबसे शक्तिशाली — तत्काल कुण्डलिनी जागरण संभव।
  • दूर से भी संभव (संकल्प शक्ति)।

4. स्वप्न दीक्षा: गुरु/देवता स्वप्न में मंत्र दें — दुर्लभ।

तंत्रसार: 'दीयते ज्ञानं क्षीयते पापम् — दीक्षा' = ज्ञान दिया जाए, पाप क्षीण हो = दीक्षा।

ध्यान रखें: तांत्रिक दीक्षा = अत्यंत गोपनीय। बिना दीक्षा तांत्रिक मंत्र = निष्फल/हानिकारक।

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शास्त्रीय स्रोत
शाक्त आगम, तंत्रसार, कामिकागम, शैव तंत्र
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