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तंत्र शास्त्र📜 गुरु गीता, तंत्रसार, कुलार्णव तंत्र1 मिनट पठन

तांत्रिक साधना में गुरु का होना क्यों अनिवार्य है?

संक्षिप्त उत्तर

कुलार्णव: 'गुरु बिना मंत्र नहीं।' कारण: मंत्र चैतन्य (गुरु जागृत करें), सूक्ष्म विधि (भूल=गंभीर), शक्ति हस्तांतरण (परंपरा), सुरक्षा कवच (उग्र शक्तियां), अनुभव (ग्रंथ≠अनुभव)। गुरु गीता: 'गु=अंधकार, रु=प्रकाश।'

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विस्तृत उत्तर

तांत्रिक साधना में गुरु अनिवार्य — यह तंत्र शास्त्र का सर्वमान्य सिद्धांत:

कारण

  1. 1मंत्र चैतन्य: बिना दीक्षा मंत्र 'निद्रित' (सोया) — गुरु प्राण डालकर जागृत करते हैं।
  2. 2सूक्ष्म ज्ञान: तांत्रिक विधि = अत्यंत सूक्ष्म — एक भूल = गंभीर परिणाम। गुरु सही मार्ग दिखाते हैं।
  3. 3शक्ति हस्तांतरण: तंत्र = शक्ति विद्या — शक्ति गुरु→शिष्य परंपरा से प्रवाहित।
  4. 4सुरक्षा कवच: तांत्रिक साधना में उग्र शक्तियां — गुरु कृपा = सुरक्षा कवच।
  5. 5अनुभव: ग्रंथ = सिद्धांत। गुरु = अनुभव + मार्गदर्शन।

कुलार्णव तंत्र: 'गुरुं विना न मंत्राः स्युः' — गुरु बिना मंत्र नहीं होते।

गुरु गीता: 'गुकारस्त्वन्धकारो हि रुकारस्तेज उच्यते। अज्ञानग्रासकं ब्रह्म गुरुरेव न संशयः।।' — 'गु'=अंधकार, 'रु'=प्रकाश। अज्ञान नाश करने वाला = गुरु।

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शास्त्रीय स्रोत
गुरु गीता, तंत्रसार, कुलार्णव तंत्र
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