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सर्व संकट नाशक शिव मंत्र: हर बाधा व संकट का अंत (अचूक) !
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सर्व संकट नाशक शिव मंत्र: हर बाधा व संकट का अंत (अचूक) !

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शरभेश्वर (शरभ) अवतार के मंत्र

शरभेश्वर (शरभ) अवतार के मंत्र

परिचय:

शरभेश्वर या शरभ, भगवान शिव का एक अत्यंत अद्भुत, शक्तिशाली और उग्र अवतार है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए नृसिंह अवतार धारण किया और उनका क्रोध शांत नहीं हो रहा था, तब समस्त सृष्टि की रक्षा हेतु भगवान शिव ने शरभ का रूप धारण किया। शरभ का स्वरूप आधा सिंह और आधा पक्षी (मुख्यतः गरुड़ या उल्लू की तरह) का है, जिनके आठ पैर, वज्र के समान तीक्ष्ण नख, अत्यंत उग्र चोंच और जिह्वा, तथा दो विशाल पंख होते हैं, जिन पर काली और दुर्गा विराजित मानी जाती हैं। उन्होंने भगवान नृसिंह के उग्र रूप को शांत किया था।

मूल मंत्र

ॐखेंखांखंफट्प्राणग्रहसि−प्राणग्रहसिहुंफट्सर्वशत्रुसंहारणायशरभशालुवायपक्षिराजायहुंफट्स्वाहा।

विनियोग, न्यास, ध्यान:

इस मंत्र के विधिवत अनुष्ठान में विशिष्ट विनियोग (अस्य श्रीशरभेश्वरमंत्रस्य कालाग्नि रुद्रः ऋषिः...), करन्यास, हृदयादिन्यास और ध्यान (चंद्रादित्याग्निदृष्टिः...) का विधान है, जो इसकी तांत्रिक प्रकृति को दर्शाता है।

महत्व एवं लाभ:

यह अक्षरों का महामंत्र भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाला है। इसके जाप से साधक सभी पापों से मुक्त होकर परम सौभाग्य प्राप्त करता है। यह दिव्य मंत्र राजभय, चोरभय, मृत्युभय का विनाशक और सर्व विजय प्रदाता है। विधिपूर्वक साधना करने से सभी आपदाओं से मुक्त होकर साधक शिवधाम को प्राप्त करता है। यह शत्रुओं का समूल नाश करता है और सभी बाधाओं से मुक्ति दिलाता है।

जाप विधि:

इस महामंत्र के प्रत्येक अक्षर पर एक हजार जप करने से कुल 42,000 जप होते हैं। इसके उपरांत दशांश हवन, हवन का दशांश तर्पण, तर्पण का दशांश मार्जन एवं मार्जन का दशांश ब्राह्मण भोजन कराने का विधान है। अधिक लाभ और पूर्ण सिद्धि के लिए विधिवत् एक लाख जप करने का भी निर्देश है।

सावधानी:

शरभेश्वर के प्रयोग अत्यंत शक्तिशाली और नृसिंह से भी अधिक घातक माने गए हैं। अतः इनकी साधना आत्मरक्षा कवच और योग्य गुरु के संरक्षण में ही करनी चाहिए। यह उच्च कोटि के साधकों के लिए ही उपयुक्त है।

शरभ गायत्री मंत्र

ॐपक्षिराजायविद्महेशरभेश्वरायधीमहितन्नोरुद्रःप्रचोदयात्।

अन्य शरभ मंत्र

एक वैकल्पिक शरभ मंत्र का भी उल्लेख मिलता है:

ॐनमोअष्टपादासहस्त्रबावेदसरसेत्रिनेत्रदुपक्षअगनिवरणामृगविहंगगरुपायवीरसर्वेस्वरायओम।

यह मंत्र भी अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। एक अन्य मंत्र भेरु तंत्र से उद्धृत है:

ओमखमखामखमफटशत्रुग्रसग्रसहोफटसर्वाससंघारसवायपक्षीराजयहोफटस्वाहानम।

शरभेश्वर के मंत्र अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली तांत्रिक साधनाओं से सम्बंधित हैं। इनकी जटिल साधना विधि, जिसमें विस्तृत न्यास, ध्यान और विशिष्ट सावधानियां सम्मिलित हैं, इन्हें केवल दीक्षित और अत्यंत योग्य साधकों के लिए ही उपयुक्त बनाती है। इसी कारण ये मंत्र जनसामान्य में सर्वथा अल्पज्ञात हैं।