विस्तृत उत्तर
वामाचार और दक्षिणाचार = तंत्र साधना के दो प्रमुख मार्ग:
दक्षिणाचार (दक्षिण मार्ग)
- ▸सात्विक, शुद्ध, वैदिक-सम्मत।
- ▸पंचमकार का प्रतीकात्मक प्रयोग (मदिरा = अमृत, मांस = जिह्वा संयम, मत्स्य = प्राणायाम, मुद्रा = ध्यान, मैथुन = कुण्डलिनी-शिव मिलन)।
- ▸सामान्य भक्तों के लिए उपयुक्त।
- ▸मंत्र, पूजा, हवन, ध्यान = प्रमुख।
वामाचार (वाम मार्ग)
- ▸उग्र, गोपनीय, विवादास्पद।
- ▸पंचमकार का यथार्थ (literal) प्रयोग — मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा, मैथुन।
- ▸अत्यंत उन्नत साधकों के लिए — सामान्य व्यक्ति के लिए नहीं।
- ▸श्मशान साधना, रात्रि पूजा, उग्र देवता।
- ▸गुरु दीक्षा = अत्यंत अनिवार्य।
महानिर्वाण तंत्र: कलियुग में वामाचार केवल पूर्ण दीक्षित, पवित्र और संयमी साधकों के लिए — सामान्य मनुष्यों के लिए दक्षिणाचार ही उचित।
वैष्णव तंत्र: शुद्ध दक्षिणाचार — पंचमकार पूर्णतः निषिद्ध।
ध्यान रखें: वामाचार = अत्यंत गोपनीय और विवादास्पद। इसकी गलत व्याख्या = समाज में तंत्र की बदनामी का प्रमुख कारण।