विस्तृत उत्तर
कवच = मंत्र/स्तोत्र द्वारा शरीर के प्रत्येक अंग की दैवी सुरक्षा — 'कवच' = 'बख्तर/शस्त्र-रोधक'।
कवच क्या है: शरीर के प्रत्येक अंग (शिर, मुख, हृदय, नाभि, पाद आदि) पर देवता/मंत्र की रक्षा स्थापित। कवच पाठ = अदृश्य सुरक्षा कवच धारण।
प्रसिद्ध कवच
- 1देवी कवच (दुर्गा सप्तशती) — सर्वरक्षा।
- 2नारायण कवच (श्रीमद्भागवत 6.8) — विष्णु सुरक्षा।
- 3रामरक्षा स्तोत्र — राम कवच।
- 4हनुमान कवच — भय नाश।
- 5शिव कवच / त्रैलोक्य विजय कवच।
कैसे धारण करें
- 1प्रतिदिन पाठ — कवच स्तोत्र पढ़ना ही 'धारण' करना है।
- 2प्रातःकाल/यात्रा पूर्व/संकट काल में।
- 3शुद्ध स्वर में, भक्ति भाव से।
- 4कवच = अंग-अंग रक्षा — प्रत्येक श्लोक में 'रक्षतु' (रक्षा करें)।
यंत्र/ताबीज कवच: कुछ कवच लिखकर ताबीज में रखकर शरीर पर धारण — गुरु से अभिमंत्रित।
बिना दीक्षा सभी कवच पाठ कर सकते हैं — ये भक्ति स्तोत्र हैं।




