कालभैरव के तीव्र मंत्र (संकट एवं शत्रु नाश हेतु)
बीज मंत्र
मंत्र: ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नमः
अन्य मंत्र
मंत्र 1: ॐ भैरवाय नमः
मंत्र 2: ॐ कालभैरवाय नमः
मंत्र 3: ॐ भ्रं कालभैरवाय फट्
तीक्ष्णदन्त मंत्र
मंत्र: ॐ तीक्ष्णदन्त महाकाय कल्पान्तदोहनम्। भैरवाय नमस्तुभ्यं अनुज्ञां दातुर्माहिसि।
देवता
कालभैरव (भगवान शिव का उग्र स्वरूप)।
स्रोत
इन मंत्रों का स्पष्ट पौराणिक स्रोत उल्लेखित नहीं है, ये मुख्यतः तांत्रिक परंपरा और भैरव उपासना से सम्बंधित हैं। रुद्रयामल तंत्र या मंत्र महोदधि जैसे ग्रंथों में भैरव मंत्रों का विस्तृत वर्णन मिलता है ।
प्रयोजन
बुरी शक्तियों से रक्षा, शत्रुओं का नाश, रोगों से मुक्ति, अकाल मृत्यु का भय निवारण, धन-धान्य की प्राप्ति, मन की शांति, आत्मविश्वास में वृद्धि, तथा ग्रह दोष शांति ।
विधि
कालभैरव मंत्रों का जाप विशेष रूप से अमावस्या, कृष्ण पक्ष की अष्टमी या रविवार की रात्रि में अधिक फलदायी माना जाता है। साधना से पूर्व शारीरिक और मानसिक शुद्धता आवश्यक है। रुद्राक्ष की माला से १०८ बार या अधिक जप किया जा सकता है। भैरव जी की तस्वीर या मूर्ति के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाकर ध्यान करना चाहिए ।
महत्व
कालभैरव भगवान शिव के रौद्र रूप हैं और उनकी उपासना शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है, विशेषकर संकट निवारण और शत्रु शमन के लिए। उपरोक्त बीज मंत्र और अन्य मंत्र सामान्य भैरव स्तोत्रों की अपेक्षा अधिक तीव्र और सीधे देवता की उग्र शक्ति से जुड़ने वाले हैं, जिस कारण ये सामान्य साधकों में कम प्रचलित हैं और इनकी साधना में सावधानी अपेक्षित होती है।






