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भैरव साधना📜 शाक्त-शैव तंत्र परंपरा, काल भैरव अष्टकम्, बटुक भैरव तंत्र2 मिनट पठन

भैरव मंत्र क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

भैरव के प्रमुख मंत्र: बटुक भैरव — 'ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ॐ' (संकट नाश); 'ॐ ह्रीं बटुकाय नमः' (नित्य जप); काल भैरव — 'ॐ काल भैरवाय नमः'; भैरव गायत्री — 'ॐ भैरवाय विद्महे महाकालाय धीमहि।' नित्य 108 बार जप।

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विस्तृत उत्तर

भैरव मंत्रों का वर्णन शैव-शाक्त तंत्र परंपरा में मिलता है:

1बटुक भैरव का प्रमुख मंत्र

> ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ॐ

अर्थ: हे बटुक भैरव, संकट से उद्धार करो।

उपयोग: संकट और विपदा में रक्षा के लिए।

2बटुक भैरव बीज मंत्र

> ॐ ह्रीं बटुकाय नमः

नित्य जप के लिए। 108 बार।

3काल भैरव मंत्र

> ॐ काल भैरवाय नमः

काल भैरव की नित्य पूजा में।

4भैरव गायत्री

> ॐ भैरवाय विद्महे महाकालाय धीमहि। तन्नो भैरवः प्रचोदयात्।

5भैरव रक्षा मंत्र

> ॐ ह्रीं भैरवाय रक्षाकराय ह्रीं ॐ

भय नाश और रक्षा के लिए।

6काल भैरव अष्टकम् — प्रथम श्लोक (शंकराचार्य)

> 'देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपंकजं,

> व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।

> नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगम्बरं,

> काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे।'

उद्देश्यानुसार मंत्र

| उद्देश्य | मंत्र |

|---------|-------|

| संकट नाश | ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय... |

| नित्य पूजा | ॐ ह्रीं बटुकाय नमः |

| भय नाश | ॐ काल भैरवाय नमः |

| रक्षा | ॐ ह्रीं भैरवाय रक्षाकराय... |

जप संख्या

  • नित्य: 108 बार
  • संकट में: 1008 बार
  • 21 दिन × 1008 = विशेष अनुष्ठान
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शास्त्रीय स्रोत
शाक्त-शैव तंत्र परंपरा, काल भैरव अष्टकम्, बटुक भैरव तंत्र
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