विस्तृत उत्तर
भैरव साधना का वर्णन शिव पुराण, काल भैरव तंत्र और कालिका पुराण में मिलता है:
भैरव का परिचय
भैरव शिव के उग्र रूप हैं। 'भैरव' = भय + रव — जो भय की ध्वनि करते हैं या जो भय का नाश करते हैं।
शिव पुराण में भैरव की उत्पत्ति:
ब्रह्मा के अहंकार को नष्ट करने के लिए शिव ने भैरव रूप धारण किया। भैरव ने ब्रह्मा का पाँचवाँ सिर काट दिया — इसी से वे 'कपालिक' कहलाए।
भैरव के प्रमुख रूप
- 1काल भैरव — काशी के कोतवाल; काल (मृत्यु) के नियंत्रक
- 2बटुक भैरव — बालक रूप; संकट हरण
- 3स्वर्णाकर्षण भैरव — धन आकर्षण
- 4अष्ट भैरव — आठ दिशाओं के रक्षक
काल भैरव मंत्र
> ॐ ह्रीं वं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय
सरल भैरव मंत्र
> ॐ ह्रीं बं भैरवाय नमः
भैरव गायत्री
> ॐ त्रिपुरान्तकाय विद्महे कालरूपाय धीमहि। तन्नः कालभैरवः प्रचोदयात्॥
भैरव साधना के दो प्रकार
1काल भैरव भक्ति (सामान्य साधक)
- ▸रात्रि में — विशेषकर शनिवार या कृष्ण पक्ष अष्टमी
- ▸काल भैरव का चित्र/प्रतिमा
- ▸सरसों तेल का दीप
- ▸सरसों, काले तिल, उड़द का भोग
- ▸'ॐ ह्रीं बं भैरवाय नमः' — 108 बार
- ▸सामान्य भक्त के लिए सुरक्षित
2उच्च भैरव तंत्र साधना
- ▸श्मशान या एकांत रात्रि साधना
- ▸गुरु दीक्षा अनिवार्य
- ▸केवल सिद्ध तांत्रिकों के लिए
भैरव साधना के फल
- 1भय का नाश — विशेषकर मृत्यु भय
- 2शत्रु और बाधाओं से रक्षा
- 3न्याय प्राप्ति (काल भैरव न्याय के देवता हैं)
- 4काशी में मोक्ष — जो काल भैरव की शरण में है
काशी और भैरव
शिव पुराण के अनुसार — काशी में मृत्यु होने पर भगवान शिव स्वयं 'तारक मंत्र' कान में देते हैं। काल भैरव काशी के कोतवाल हैं — वे यहाँ मोक्ष की व्यवस्था करते हैं।
सावधानी: श्मशान भैरव साधना बिना गुरु दीक्षा के न करें।




