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अघोर गुप्त मंत्र: तांत्रिक बाधा, ग्रह दोष व नकारात्मकता नाशक !
अघोरेश्वर

अघोर गुप्त मंत्र: तांत्रिक बाधा

📿 पौराणिक•2 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 20 मई 2025
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अघोरेश्वर शिव के इस अत्यंत गोपनीय और उग्र शाबर मंत्र से की गई साधना न केवल तांत्रिक बाधाओं को नष्ट करती है, बल्कि ग्रहदोष, रोग और कर्मबंधनों से भी मुक्ति देती है। जानें संपूर्ण विधि, पूजन सामग्री, रक्षा विधान और ११ दिवसीय मंत्र जप क्रम — शिवरात्रि या श्रावण मास में यह साधना विशेष प्रभाव...

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अघोर शिव मंत्र (सर्वसिद्धि एवं तांत्रिक क्रिया शमन)

अघोर शिव मंत्र (सर्वसिद्धि एवं तांत्रिक क्रिया शमन)

॥ ॐ ह्रां ह्रीं हूं अघोरेभ्यो  सर्वसिद्धिं देहि−देहि अघोरेश्वराय हूं ह्रीं ह्रां ॐ फट् 

देवता:

भगवान शिव (अघोर स्वरूप)।

स्रोत:

इसका स्पष्ट पौराणिक स्रोत उल्लेखित नहीं है, यह अघोर परंपरा का एक प्रमुख मंत्र है।

प्रयोजन:

सर्वसिद्धि, सभी प्रकार की तांत्रिक क्रियाओं एवं नकारात्मक प्रभावों का शमन, ग्रह दोष शांति, असाध्य रोगों से मुक्ति, पूर्वजन्म के अशुभ कर्मों का क्षय, तथा अन्य शिव साधनाओं में शीघ्र सफलता।

विधि:

इस साधना का प्रारंभ शिवकल्प (जैसे महाशिवरात्रि) या श्रावण मास के किसी सोमवार को रात्रि १० बजे के पश्चात् करना चाहिए। साधक काले वस्त्र धारण कर उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा की ओर मुख करके बैठे। प्राण प्रतिष्ठित रुद्राक्ष या काली हकीक की माला का प्रयोग करें। पारद शिवलिंग का पूजन श्रेष्ठ है, अन्यथा नियमित पूजित शिवलिंग पर भी साधना की जा सकती है। साधना से पूर्व गुरुपूजन, गणेश पूजन, तथा रक्षा विधान (सरसों अभिमंत्रित कर दशों दिशाओं में फेंकना और आसन के चारों ओर कील या लोहे की वस्तु से सुरक्षा चक्र बनाना) करें। भस्म और चंदन मिश्रित तिलक महामृत्युंजय मंत्र से लगाएं। पारद शिवलिंग का सामान्य पूजन कर, "जय शम्भो विभो अघोरेश्वर स्वयम्भो जयशंकर। जयेश्वर जयेशान जय जय जय सर्वज्ञ कामदं ॥" इस स्तुति से भगवान अघोरेश्वर शिव का स्तवन करें। फिर मूल मंत्र की २१ माला जप करें। जप के उपरांत पुनः उपरोक्त स्तुति करें और समस्त जप भगवान अघोरेश्वर शिव को समर्पित करें। यह साधना ग्यारह दिनों तक नित्य करनी चाहिए। अंतिम दिन साधना समाप्ति पर पांच बिल्वपत्र, दूध-मिश्रित जल, अक्षत, सुगंध, वस्त्र, पुष्प, लड्डू और दक्षिणा मूल मंत्र से अर्पित करें।

महत्व:

भगवान शिव का अघोर स्वरूप अत्यंत उग्र और शक्तिशाली माना जाता है। यह मंत्र उनकी उन्हीं शक्तियों का आवाहन करता है। इसकी साधना जटिल है और इसमें विभिन्न प्रकार की अनुभूतियां (जैसे शरीर में तीव्र गर्मी, भयानक शब्द सुनाई देना) हो सकती हैं, जो साधना की सफलता का संकेत मानी जाती हैं। यह मंत्र सामान्य शिव पंचाक्षर या महामृत्युंजय मंत्र से भिन्न, एक विशिष्ट तांत्रिक एवं अघोर परंपरा का मंत्र है, जो अल्पज्ञात है।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

शिव उपासना

अघोर शिव मंत्र क्या है?

अघोर शिव का वैदिक मंत्र है — 'ॐ अघोरेभ्यो अथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः। सर्वेभ्यः सर्वशर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररूपेभ्यः॥' (शुक्लयजुर्वेद)। तांत्रिक साधना-मंत्र है — 'ॐ ह्रौं अघोर शिवाय नमः'। 'अघोर' का अर्थ है — जो किसी के लिए भयंकर नहीं, बल्कि सबके लिए सुलभ और कल्याणकारी है।

शिव अवतार कथा

अश्वत्थामा शिव के किस अवतार का अंश है

अश्वत्थामा शिव के 'सवन्तिक रुद्र' अंशावतार हैं। द्रोणाचार्य की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने सवन्तिक रुद्र के अंश से उनके पुत्र रूप में जन्म लिया। जन्म से मस्तक में दिव्य मणि थी जो उन्हें अजेय बनाती थी।

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हाटकेश्वर शिवलिंग क्या है?

हाटकेश्वर शिवलिंग पाताल में ब्रह्मा द्वारा स्थापित भगवान शिव का विशाल दिव्य लिंग है।

महेश्वर कवचम् परिचय और आधार

महेश्वर स्वरूप क्या है?

महेश्वर (महान ईश्वर) भगवान शिव का वह स्वरूप है जो उनकी कल्याणकारी, सहज कृपालु और सौम्य प्रकृति को दर्शाता है — यह हर जीव पर अनुकंपा बरसाने वाला स्वरूप है।

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हाटकेश्वर शिव कौन हैं?

हाटकेश्वर शिव वितल लोक में स्थित भगवान शिव का स्वरूप है, जो माता भवानी के साथ वहाँ निवास करते हैं।

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