विस्तृत उत्तर
श्मशान भैरव शिव के उग्र और भयंकर स्वरूपों में से एक हैं। उनकी साधना तांत्रिक श्रेणी में आती है और यह अत्यंत गोपनीय एवं कठोर नियमों वाली साधना है।
महत्वपूर्ण चेतावनी
श्मशान भैरव मंत्र का जप बिना दीक्षित गुरु के मार्गदर्शन के कदापि नहीं करना चाहिए। यह तांत्रिक मंत्र है और इसके गलत प्रयोग से गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं।
सामान्य जानकारी (केवल शैक्षणिक उद्देश्य से)
काल भैरव का स्वरूप
काल भैरव शिव के आठ भैरव रूपों (अष्ट भैरव) में से एक हैं। वे काशी (वाराणसी) के कोतवाल (रक्षक) माने जाते हैं।
साधना काल
- ▸रात्रि का समय (विशेषतः अर्धरात्रि)
- ▸अमावस्या या अष्टमी तिथि
- ▸कालाष्टमी (प्रत्येक मास की कृष्ण अष्टमी)
- ▸भैरवाष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी)
सामान्य काल भैरव मंत्र (दीक्षा सहित)
'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः'
— यह बटुक भैरव मंत्र अपेक्षाकृत सौम्य है और भय निवारण, रक्षा के लिए प्रयुक्त होता है।
नियम
- ▸गुरु दीक्षा अनिवार्य
- ▸ब्रह्मचर्य का कठोर पालन
- ▸तामसिक आहार कुछ तांत्रिक विधानों में विहित है (परंपरा भिन्न)
- ▸काले वस्त्र, काली माला
- ▸श्मशान या एकांत स्थान
- ▸गोपनीयता अत्यावश्यक
यह साधना किसे नहीं करनी चाहिए
- ▸बिना गुरु दीक्षा के
- ▸भयभीत या मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति
- ▸बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं
- ▸जिनकी मूल साधना (नित्य पूजा, जप) नियमित न हो
[समीक्षा आवश्यक]: श्मशान भैरव की विशिष्ट मंत्र विधि के लिए प्रमाणिक तांत्रिक ग्रंथ और दीक्षित गुरु ही एकमात्र विश्वसनीय स्रोत हैं। ऑनलाइन या पुस्तकों में दी गई विधियों पर बिना गुरु परामर्श के विश्वास न करें।
