विस्तृत उत्तर
संजीवनी मंत्र' = महामृत्युंजय मंत्र का ही एक नाम है। इसे 'मृत-संजीवनी मंत्र' भी कहते हैं।
कारण: यह मंत्र मरणासन्न व्यक्ति को भी जीवनदान दे सकता है — इसलिए 'संजीवनी' (जीवन देने वाला)। मार्कंडेय ने इसी मंत्र से मृत्यु (यमराज) पर विजय प्राप्त की।
मंत्र: 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥'
अर्थ: 'हम तीन नेत्रों वाले (शिव) की पूजा करते हैं जो सुगंधित और पुष्टिवर्धक हैं। जैसे ककड़ी (उर्वारुक) पक कर डंठल से स्वतः अलग हो जाती है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमृत (मोक्ष) से वंचित न करें।'
जप विधि
- 1रुद्राक्ष माला, 108 बार नित्य।
- 2सोमवार/प्रदोष विशेष।
- 3रोगी के पास बैठकर जप = रोगी को लाभ।
- 4अनुष्ठान: सवा लाख + दशांश हवन (घी + तिल)।
- 5शिवलिंग अभिषेक + जप = अत्यंत प्रभावी।
उपयोग: अकाल मृत्यु भय, गंभीर रोग, दुर्घटना, सर्व कष्ट, ग्रह दोष, कालसर्प दोष।





