विस्तृत उत्तर
भैरव साधना की विधि भैरव तंत्र और शिव पुराण में वर्णित है:
भैरव परिचय
भैरव = शिव का उग्र रूप। 64 भैरव हैं। काल भैरव — सर्वप्रमुख। काशी के क्षेत्रपाल।
शुभ समय: शनिवार रात्रि या अमावस्या की रात्रि — विशेष।
सामग्री
- ▸काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल
- ▸नीले या काले फूल
- ▸कपूर, धूप
- ▸सरसों तेल का दीपक (पाँच बाती)
- ▸नारियल जल (दक्षिण मार्ग में)
विधि (दक्षिण मार्ग)
- 1स्नान, काले या लाल वस्त्र
- 2भैरव की प्रतिमा/चित्र स्थापना
- 3पंचोपचार पूजा
- 4सरसों तेल का दीपक जलाएं
- 5काल भैरव अष्टकम् पाठ (आदि शंकराचार्य)
- 6मंत्र जप: 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय ह्रीं।'
- 7108 या 1008 जप
- 8नैवेद्य — उड़द की दाल, काले तिल
- 9क्षमा प्रार्थना
फल: अकाल मृत्यु, शत्रु और बाधाओं से रक्षा।




