ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
त्रिपुर भैरवी साधना: षट्चक्र और चेतना जागरण की दुर्लभ विधि !
त्रिपुर भैरवी

त्रिपुर भैरवी साधना: षट्चक्र और चेतना जागरण की दुर्लभ विधि !

📿 पौराणिक5 मिनट पढ़ें
WhatsApp
त्रिपुर भैरवी मूल मंत्र
त्रिपुर भैरवी मूल मंत्र (साधना सिद्धि हेतु)
मंत्र:
हसैं हसकरीं हसैं
अथवा
ॐ हसरीं त्रिपुर भैरव्यै नम: ॥
विनियोग:
ॐ अस्य श्री त्रिपुर भैरवी मंत्रस्य दक्षिणामूर्ति ऋषि: पंक्तिश्छ्न्द: त्रिपुर भैरवी देवता वाग्भवो बीजं शक्ति बीजं शक्ति: कामराज कीलकं श्रीत्रिपुरभैरवी प्रीत्यर्थे जपे विनियोग:
देवता: त्रिपुर भैरवी (दस महाविद्याओं में से एक)
स्रोत: भैरवी तंत्र, शक्ति संगम तंत्र आदि
प्रयोजन: चित्त-शुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति, साधनाओं में सिद्धि, ज्ञान एवं भौतिक-आध्यात्मिक ऐश्वर्य की प्राप्ति।
विधि:
  • साधना का प्रारंभ विनियोग, ऋष्यादि न्यास, कर न्यास, हृदयादि न्यास से करें।
  • देवी त्रिपुर भैरवी का ध्यान करते हुए मूल मंत्र का जप करें।
  • जप हेतु लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें।
  • साधना एकांत स्थान पर, शुद्धतापूर्वक करें।
महत्व: त्रिपुर भैरवी, जिन्हें षोडशी या ललिता के उग्र रूप में भी जाना जाता है, तीव्र ऊर्जा और शक्ति की देवी हैं। इनकी साधना साधक को कुंडलिनी जागरण, षट्चक्र भेदन और त्रिलोक विजय की क्षमता देती है। यह महाविद्या अत्यंत शक्तिशाली है, किंतु कठिन साधना के कारण साधारण साधकों में अल्पज्ञात है।