अथवा
ॐ हसरीं त्रिपुर भैरव्यै नम: ॥
- साधना का प्रारंभ विनियोग, ऋष्यादि न्यास, कर न्यास, हृदयादि न्यास से करें।
- देवी त्रिपुर भैरवी का ध्यान करते हुए मूल मंत्र का जप करें।
- जप हेतु लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें।
- साधना एकांत स्थान पर, शुद्धतापूर्वक करें।






