धूमावती देवी के उग्र मंत्र (शत्रु नाश एवं दुर्भाग्य शमन हेतु)
महामंत्र:
धूं धूं धूमावती ठ: ठ
अन्य मंत्र:
ॐ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा:
ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्।।
ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्।।
गायत्री मंत्र:
ॐ धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात।
तांत्रोक्त मंत्र:
धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे। सौभाग्यदात्री सदैव करुणामयि:।।
- धूमावती जयंती या किसी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रुद्राक्ष माला से 21, 51 या 108 बार जाप करें।
- ऋण मुक्ति के लिए नीम की पत्तियों सहित घी का होम करें।
- शत्रु नाश के लिए राई में सेंधा नमक मिलाकर होम करें।
- इनकी साधना एकांत में, विशेषकर रात्रि में करें।
धूमावती देवी विधवा, अभाव, शून्य और रिक्तता की देवी मानी जाती हैं। इनकी साधना अत्यंत
कठिन और गूढ़ होती है। वे शीघ्र अप्रसन्न भी हो सकती हैं, अतः साधक को अत्यंत सावधानी
और गुरु के निर्देशन में ही इनकी उपासना करनी चाहिए। ये अल्पज्ञात इसलिए भी हैं
क्योंकि इनका स्वरूप और प्रकृति सामान्य देवी-देवताओं से भिन्न है और इनकी उपासना
मुख्यतः तांत्रिकों और विशेष साधकों द्वारा ही की जाती है।






