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धूमावती उग्र मंत्र: दुर्भाग्य, दरिद्रता और शत्रु नाश का उपाय !
धूमावती

धूमावती उग्र मंत्र: दुर्भाग्य, दरिद्रता और शत्रु नाश

📿 पौराणिक•1 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 19 मई 2025
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जानिए धूमावती माता की रहस्यमयी साधना विधि, होम सामग्री, रात्रि साधना के लाभ और कैसे ये महाविद्या देवी देती हैं मोक्ष, सौभाग्य और ऋण मुक्ति

ज्ञान-सार

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धूमावती देवी के उग्र मंत्र
धूमावती देवी के उग्र मंत्र (शत्रु नाश एवं दुर्भाग्य शमन हेतु)
महामंत्र:
धूं धूं धूमावती ठ: ठ
अन्य मंत्र:
ॐ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा:
ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्।।
गायत्री मंत्र:
ॐ धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात।
तांत्रोक्त मंत्र:
धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे। सौभाग्यदात्री सदैव करुणामयि:।।
देवता: धूमावती माता (दस महाविद्याओं में से एक, ज्येष्ठा देवी)
स्रोत: धूमावती तंत्र, प्राणतोषिणी तंत्र आदि
प्रयोजन: शत्रु नाश, दुर्भाग्य एवं दरिद्रता का शमन, ऋण मुक्ति, रोग निवारण, तथा मोक्ष प्राप्ति। यह सौभाग्यदात्री और करुणामयी भी हैं।
विधि:
  • धूमावती जयंती या किसी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रुद्राक्ष माला से 21, 51 या 108 बार जाप करें।
  • ऋण मुक्ति के लिए नीम की पत्तियों सहित घी का होम करें।
  • शत्रु नाश के लिए राई में सेंधा नमक मिलाकर होम करें।
  • इनकी साधना एकांत में, विशेषकर रात्रि में करें।
महत्व: धूमावती देवी विधवा, अभाव, शून्य और रिक्तता की देवी मानी जाती हैं। इनकी साधना अत्यंत कठिन और गूढ़ होती है। वे शीघ्र अप्रसन्न भी हो सकती हैं, अतः साधक को अत्यंत सावधानी और गुरु के निर्देशन में ही इनकी उपासना करनी चाहिए। ये अल्पज्ञात इसलिए भी हैं क्योंकि इनका स्वरूप और प्रकृति सामान्य देवी-देवताओं से भिन्न है और इनकी उपासना मुख्यतः तांत्रिकों और विशेष साधकों द्वारा ही की जाती है।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

दस महाविद्या

धूमावती माता की साधना विधवा देवी की उपासना क्यों कहते हैं?

धूमावती = सातवीं महाविद्या, 'विधवा देवी'। स्वरूप: वृद्ध, धूमिल वस्त्र, सूप, कौवा वाहन। कथा: पार्वती ने शिव निगले → धुएं से बाहर → विधवा श्राप। दार्शनिक: अशुभ में शुभ, वैराग्य/नश्वरता प्रतीक। अलक्ष्मी शांत → लक्ष्मी प्राप्ति। गुरु दीक्षा अनिवार्य। शनिवार/अमावस्या विशेष।

तंत्र साधना

धूमवती मंत्र जपने का समय

धूमावती साधना हमेशा अमावस्या या मध्यरात्रि में एकांत स्थानों पर की जाती है। गृहस्थों के लिए इस मंत्र का जप वर्जित माना गया है, यह मुख्यतः संन्यासियों के लिए है।

तंत्र साधना

धूमावती साधना कैसे करें?

धूमावती = विधवा-स्वरूपा, धूम्रवर्णा — विघ्न-विपत्ति में शक्ति की देवी। मंत्र: 'ॐ धूं धूं धूमावत्यै स्वाहा'। शनिवार, अमावस्या, रात्रि। सफेद/ग्रे वस्त्र। भोग: सूखी रोटी-चना। फल: विघ्न-नाश, शत्रु-ज्ञान, दरिद्रता-निवारण। काक-वाहन, सूप-हस्त — ध्यान। दीक्षा अनिवार्य।

पूजा विधान

धूमावती साधना में न्यास कैसे करते हैं?

धूमावती न्यास: पिप्पलाद ऋषि = शिर में। त्रिव्रत् छंद = मुख में। श्री ज्येष्ठा धूमावती देवता = हृदय में।

शक्ति उपासना

धूमावती मंत्र की साधना कैसे होती है और मातंगी देवी का मंत्र क्या है?

धूमावती का मंत्र है — 'ऊँ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा', 'धूं' उनका बीज है। वे विपत्ति-निवारण की तांत्रिक देवी हैं। मातंगी का मंत्र है — 'ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा', वे कला, संगीत और वाक्-सिद्धि की सौम्य देवी हैं। दोनों दस महाविद्याओं की शक्तियाँ हैं।

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