विस्तृत उत्तर
धूमावती साधना — अभाव और विघ्न-नाश की रहस्यमयी देवी:
धूमावती का परिचय
दशमहाविद्याओं में सप्तम। 'धूम' = धुआँ, 'वती' = युक्त। धुएँ-जैसे वर्ण की विधवा-स्वरूपा देवी। शिव को निगल जाने के बाद उन्हें 'विधवा' की उपाधि मिली — अत्यंत रहस्यमय। ये 'अलक्ष्मी' नहीं — विपरीत परिस्थितियों में अजेय रहने की शक्ति की देवी हैं।
धूमावती का तात्विक अर्थ
शाक्त प्रमोद: धूमावती = अभाव की देवी नहीं। वे 'अभाव में भी आनंद' और 'विपत्ति में शक्ति' की देवी हैं। उनकी साधना से — अभाव और विघ्न स्वयं नमस्कार करते हैं।
धूमावती-साधना की विधि
1मंत्र
- ▸बीज: 'धूं धूं'
- ▸मूल मंत्र: 'ॐ धूं धूं धूमावत्यै स्वाहा'
- ▸विस्तृत मंत्र: 'धूं धूं धूमावती ठः ठः' — गुरु-दत्त
2काल
- ▸शनिवार — धूमावती का वार
- ▸अमावस्या और अष्टमी
- ▸रात्रि-काल — सर्वोत्तम
3वस्त्र
सफेद या ग्रे (धुएँ-रंग) — देवी के अनुरूप।
4ध्यान-स्वरूप (धूमावती तंत्र)
श्वेतवर्णा या धूम्रवर्णा, वृद्धा, दीर्घ-दंत, विधवा-वेश, मलिन-वस्त्र, काक-वाहन (कौआ), हाथ में सूप — धूमावती का ध्यान।
5भोग
सूखी रोटी, चना, सात्विक सरल भोजन — धूमावती विलासिता नहीं चाहतीं।
6यंत्र
धूमावती यंत्र — अष्टकोण में धूमावती।
7पुरश्चरण
धूं धूं' = 2 अक्षर = 2 लाख। मूल मंत्र = अक्षर-संख्या × 1 लाख।
धूमावती-सिद्धि के फल
- ▸विघ्न और शत्रु-नाश — सर्वप्रमुख
- ▸दरिद्रता-दोष निवारण (विरोधाभास: दरिद्रता-स्वरूपा देवी दरिद्रता नष्ट करती हैं)
- ▸गुप्त शत्रु का ज्ञान
- ▸मारण, उच्चाटन आदि तांत्रिक प्रयोगों में
महत्वपूर्ण
धूमावती-साधना शनिवार और अमावस्या को शुभ — अन्य समय में न करें। यह उग्र देवी हैं — दीक्षा अनिवार्य।
