कराली (गुह्यकाली) देवी: मंत्र,
1.1 गुह्यकाली का एकाक्षर महामंत्र
महाकाल संहिता के गुह्यकाली खण्ड के पाँचवे पटल में देवी के एकाक्षर (एक अक्षर वाले) मंत्र
का वर्णन मिलता है। यह मंत्र समस्त मंत्रों का राजा माना जाता है और इसे 'प्रणव' (ॐ) के समान ही प्रभावशाली बताया गया है।
मूल मंत्र:
ॐ फ्रें
ग्रंथ संदर्भ: महाकाल संहिता।
मंत्रार्थ एवं विवेचना:
तांत्रिक बीजकोशों के अनुसार, 'फ्रें' (Phrem) गुह्यकाली का महाबीज है। इसमें समाहित ध्वनियों का अर्थ इस प्रकार है:
तांत्रिक बीजकोशों के अनुसार, 'फ्रें' (Phrem) गुह्यकाली का महाबीज है। इसमें समाहित ध्वनियों का अर्थ इस प्रकार है:
- फ: यह प्रलय का वाचक है, जो अज्ञान और द्वैत के नाश का प्रतीक है।
- र: यह अग्नि का प्रतीक है, जो शोधन और प्रकाश का कारक है।
- ए : यह योनि या सृजनात्मक शक्ति का द्योतक है।
- बिंदु : यह अद्वैत चेतना और दुःखहर्ता शिव का स्वरूप है।
1.2. (16 अक्षरी) मंत्र
मंत्र का शुद्ध पाठ:
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं गुह्यकालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
ग्रंथ संदर्भ: महाकाल संहिता, गुह्यकाली खण्ड, पटल ५ 5।
मंत्र-विश्लेषण:
इस मंत्र में तीन प्रमुख बीजों का सम्पुटीकरण है:
इस मंत्र में तीन प्रमुख बीजों का सम्पुटीकरण है:
- क्रीं: यह काली का विद्या बीज है, जो क्रिया शक्ति और ज्ञान शक्ति का जागरण करता है। यहाँ इसका तीन बार प्रयोग (त्रिरावृत्ति) तीनों लोकों और तीनों गुणों (सत्, रज, तम) पर विजय का सूचक है।
- हूं: यह कूर्च बीज है, जो क्रोध भैरव का प्रतीक है और विघ्नों के नाश के लिए प्रयुक्त होता है। इसका प्रयोग रक्षा कवच के रूप में किया गया है।
- ह्रीं : यह माया बीज है, जो भुवनेश्वरी का स्वरूप है और सम्पूर्ण सृष्टि को वश में करने की क्षमता रखता है।
1.3 श्रीराम उपासित सप्तदशाक्षर मंत्र
भगवान राम द्वारा उपासित मंत्र को तंत्र शास्त्रों में अत्यंत उग्र और शीघ्र फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि
साधना पूर्ण होने के पश्चात महर्षि हारीत ने इस विद्या को 'कीलित' (लॉक) कर दिया था ताकि अपात्र व्यक्ति इसका दुरुपयोग न कर सकें।
मंत्र का शुद्ध पाठ:
ह्रीं क्लीं फ्रें हूं क्रों गुह्यकालि क्रीं छ्रीं ह्स्ख्फ्रें फ्रों छ्रीं स्त्रीं स्वाहा
ग्रंथ संदर्भ: महाकाल संहिता।