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कराली

कराली मंत्र : महाकाल संहिता, महाबीज और श्रीराम

📿 पौराणिक•2 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 17 जनवरी 2026
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कराली (गुह्यकाली) देवी के प्रमाणिक मंत्र: एकाक्षर महामंत्र, षोडशाक्षरी विद्या और श्रीराम उपासित सप्तदशाक्षर मंत्र ! कराली (गुह्यकाली) देवी: एकाक्षर, षोडशाक्षर एवं श्रीराम उपासित मंत्र | Karali Guhyakali Mantras कराली (गुह्यकाली) देवी: मंत्र, 1.1 गुह्यकाली का एकाक्षर महामंत्र महाकाल संहिता के गुह्यकाली खण्ड के पाँचवे पटल में देवी के एकाक्षर (एक अक्षर वाले) मंत्र का...

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कराली (गुह्यकाली) देवी: एकाक्षर, षोडशाक्षर एवं श्रीराम उपासित मंत्र | Karali Guhyakali Mantras

कराली (गुह्यकाली) देवी: मंत्र,

1.1 गुह्यकाली का एकाक्षर महामंत्र

महाकाल संहिता के गुह्यकाली खण्ड के पाँचवे पटल में देवी के एकाक्षर (एक अक्षर वाले) मंत्र का वर्णन मिलता है। यह मंत्र समस्त मंत्रों का राजा माना जाता है और इसे 'प्रणव' (ॐ) के समान ही प्रभावशाली बताया गया है।
मूल मंत्र: ॐ फ्रें
ग्रंथ संदर्भ: महाकाल संहिता।
मंत्रार्थ एवं विवेचना:
तांत्रिक बीजकोशों के अनुसार, 'फ्रें' (Phrem) गुह्यकाली का महाबीज है। इसमें समाहित ध्वनियों का अर्थ इस प्रकार है:
  • फ: यह प्रलय का वाचक है, जो अज्ञान और द्वैत के नाश का प्रतीक है।
  • र: यह अग्नि का प्रतीक है, जो शोधन और प्रकाश का कारक है।
  • ए : यह योनि या सृजनात्मक शक्ति का द्योतक है।
  • बिंदु : यह अद्वैत चेतना और दुःखहर्ता शिव का स्वरूप है।
इस प्रकार, 'फ्रें' मंत्र में सृष्टि और प्रलय दोनों की शक्तियाँ एक साथ स्पंदित होती हैं। महाकाल संहिता के अनुसार, यह मंत्र साधक को 'खेचरी सिद्धि' (आकाश गमन या उच्च चेतना में विचरण) प्रदान करने में समर्थ है।

1.2. (16 अक्षरी) मंत्र

मंत्र का शुद्ध पाठ: ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं गुह्यकालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
ग्रंथ संदर्भ: महाकाल संहिता, गुह्यकाली खण्ड, पटल ५ 5।
मंत्र-विश्लेषण:
इस मंत्र में तीन प्रमुख बीजों का सम्पुटीकरण है:
  • क्रीं: यह काली का विद्या बीज है, जो क्रिया शक्ति और ज्ञान शक्ति का जागरण करता है। यहाँ इसका तीन बार प्रयोग (त्रिरावृत्ति) तीनों लोकों और तीनों गुणों (सत्, रज, तम) पर विजय का सूचक है।
  • हूं: यह कूर्च बीज है, जो क्रोध भैरव का प्रतीक है और विघ्नों के नाश के लिए प्रयुक्त होता है। इसका प्रयोग रक्षा कवच के रूप में किया गया है।
  • ह्रीं : यह माया बीज है, जो भुवनेश्वरी का स्वरूप है और सम्पूर्ण सृष्टि को वश में करने की क्षमता रखता है।

1.3 श्रीराम उपासित सप्तदशाक्षर मंत्र

भगवान राम द्वारा उपासित मंत्र को तंत्र शास्त्रों में अत्यंत उग्र और शीघ्र फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि साधना पूर्ण होने के पश्चात महर्षि हारीत ने इस विद्या को 'कीलित' (लॉक) कर दिया था ताकि अपात्र व्यक्ति इसका दुरुपयोग न कर सकें।
मंत्र का शुद्ध पाठ: ह्रीं क्लीं फ्रें हूं क्रों गुह्यकालि क्रीं छ्रीं ह्स्ख्फ्रें फ्रों छ्रीं स्त्रीं स्वाहा
ग्रंथ संदर्भ: महाकाल संहिता।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

तंत्र एवं साधना

केरल तंत्र में घंटाकर्ण का क्या स्वरूप है?

केरल दारुकजित विद्या में घंटाकर्ण शिव के कर्ण-मल से उत्पन्न — भद्रकाली के रक्षक 'पुलि-भैरव'। प्रेत-बाधा और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा उनकी भूमिका। तीनों परंपराओं में वे उग्र रक्षक देवता हैं।

तीर्थ स्थल

पद्मनाभस्वामी मंदिर का रहस्य क्या है?

तिरुअनंतपुरम केरल — विश्व सबसे अमीर। 6 तहखाने = ~1.32 लाख करोड़। वॉल्ट B = आज तक नहीं खुला — न ताला, न चाबी, मंत्र से ही खुलेगा। 18 फीट विष्णु शयन। धोती/साड़ी अनिवार्य।

तीर्थ यात्रा

गुरुवायूर कृष्ण मंदिर दर्शन नियम

केरल; 'दक्षिण द्वारका'; कृष्ण बाल रूप। केवल हिंदू। पारंपरिक वस्त्र (मुंडू, शर्ट नहीं)। 3AM-1PM + 4:30-10PM। हाथी पूजा, पायसम प्रसाद। विवाह अत्यंत शुभ। कोची ~80km।

दोष निवारण

कर्ज उतारने का रामबाण मंत्र

कर्ज के जाल से शीघ्र बाहर निकलने के लिए मंगल देव के मंत्र 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' और गणेश जी के 'ऋणहर्ता मंत्र' का नियमित रूप से जप करना रामबाण उपाय है।

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अतिरात्र यज्ञ का क्या विधान है

अतिरात्र = रात भर चलने वाला सोमयाग (7 प्रकारों में छठवाँ)। विशेषता: चौथा सवन (रात्रि), अश्विनीकुमार ग्रह (भोर में)। 16 ऋत्विज्। 1975 और 2011 में केरल में सम्पन्न — Frits Staal द्वारा documented। आज अत्यन्त दुर्लभ — केवल केरल नम्बूदिरी परम्परा में जीवित।

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