नवकाली मंत्र रहस्य: महाकाल संहिता के प्रामाणिक मंत्र एवं तांत्रिक विश्लेषण
| क्र. |
काली स्वरूप |
मंत्र (शुद्ध संस्कृत पाठ) |
बीज विश्लेषण |
ग्रंथ संदर्भ |
| १. |
गुह्यकाली |
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं गुह्यकालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा |
यहाँ 'हूं' और 'ह्रीं' का सम्पुट है, जो गोपन शक्ति का प्रतीक है। |
महाकाल संहिता |
| २. |
भद्रकाली |
ॐ हौं कालि महाकालि किलिकिलि फट् स्वाहा |
'हौं' बीज शिव-शक्ति सामरस्य का है। 'किलिकिलि' उल्लास का वाचक है। |
महाकाल संहिता |
| ३. |
श्मशानकाली |
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं श्मशानकालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा |
यह मंत्र संरचना में गुह्यकाली जैसा है, परन्तु नाम भेद से फल भेद है। |
महाकाल संहिता |
| ४. |
काम कला काली |
क्लीं क्रिम हूं क्रों स्फ्रों कामकलाकाली स्फ्रों क्रों हूं क्रीं क्लीं स्वाहा |
इसमें 'स्फ्रों' बीज प्रधान है जो आकर्षण और विमर्श का द्योतक है। |
महाकाल संहिता (उत्तराध) |
| ५. |
धन काली |
ॐ औं हूं ह्रीं फ्रें छ्रीं स्त्रीं श्रीं क्रों नमो धनकाल्यै... |
यह मंत्र अत्यंत दीर्घ और भौतिक ऐश्वर्य प्रधान है। |
महाकाल संहिता |
| ६. |
काल काली |
ॐ क्रीं हूं ह्रीं स्त्रीं क्लीं कालकाली फट् स्वाहा |
'स्त्रीं' (Strīṃ) वधू बीज और 'फट्' अस्त्र बीज का प्रयोग काल (समय) के नाश हेतु है। |
महाकाल संहिता |
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