विस्तृत उत्तर
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भैरव की उत्पत्ति भगवान शिव के रूधिर से हुई थी।
इसके बाद वे काल भैरव और बटुक भैरव में विभक्त हो गए।
इसी कारण बटुक भैरव को भगवान शिव के गण और माता पार्वती जी के अनुचर के रूप में पूजा जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार भैरव की उत्पत्ति भगवान शिव के रूधिर से हुई — इसके बाद वे काल भैरव और बटुक भैरव में विभक्त हो गए।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भैरव की उत्पत्ति भगवान शिव के रूधिर से हुई थी।
इसके बाद वे काल भैरव और बटुक भैरव में विभक्त हो गए।
इसी कारण बटुक भैरव को भगवान शिव के गण और माता पार्वती जी के अनुचर के रूप में पूजा जाता है।
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