विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा के पाँचवें सिर का काटा जाना अहंकार के दमन और शिव की परम श्रेष्ठता की स्थापना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना है।
शिव पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित है कि एक समय ब्रह्माजी और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद छिड़ा। चारों वेदों से पूछा गया तो सभी ने शिव को सर्वश्रेष्ठ बताया। परंतु ब्रह्माजी का अहंकार शांत नहीं हुआ। उन्होंने वेदों के उत्तर को नकार दिया और अपने पाँचवें मुख से भगवान शिव के प्रति अपमानजनक वचन कहे — उन्होंने शिव को अपना पुत्र बताते हुए उन्हें अपनी सेवा में आने को कहा।
इस प्रकार का अहंकारपूर्ण और असत्य वचन सुनकर भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। उसी क्षण उनकी दोनों भृकुटियों के मध्य से एक भयंकर तेजस्वी पुरुष प्रकट हुआ — यही काल भैरव थे। शिव ने उन्हें 'काल का राजा' घोषित करते हुए काशी का आधिपत्य दिया।
काल भैरव ने तत्काल अपनी बाईं हाथ की सबसे छोटी अँगुली के नाखून से ब्रह्माजी के उस पाँचवें सिर को काट दिया जो अहंकार से पूर्ण था और जिससे शिव के प्रति अपमानजनक वचन निकले थे। इस प्रकार ब्रह्मा का दंभ चूर हुआ और तभी से ब्रह्माजी के केवल चार सिर रह गए।



