विस्तृत उत्तर
दक्ष के यज्ञ में शिव जी का अपमान बहुत गहरे और सुनियोजित तरीके से किया गया था।
शिव पुराण, देवी भागवत और रामचरितमानस जैसे ग्रंथों में इस प्रसंग का विस्तृत वर्णन है। जब माता सती बिना बुलाए यज्ञ में पहुँचीं, तो दक्ष ने उनके साथ भी अच्छा व्यवहार नहीं किया। दक्ष ने यज्ञ में सभी देवताओं के लिए आहुति और भाग निर्धारित किया था, परंतु जानबूझकर भगवान शिव के लिए कोई भाग या आहुति नहीं रखी गई थी। यह एक सुनियोजित अपमान था।
इसके अतिरिक्त दक्ष ने सती के सामने ही शिव जी की कटु और अपमानजनक आलोचना की। उन्होंने शिव को श्मशानवासी, भूतों-प्रेतों का स्वामी, भस्म और सर्पों से सजे अघोरी, कुल-मर्यादा से परे और देवताओं के अयोग्य कहा। उन्होंने शिव की जीवन-शैली को लेकर अनेक अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया।
यज्ञ में उपस्थित अन्य देवताओं ने भी दक्ष के डर से शिव का पक्ष नहीं लिया और चुप रहे, जो सती के लिए और भी असह्य था। सती ने उपस्थित देवताओं और शिव भक्तों से आग्रह किया कि यदि उनमें शक्ति है तो अपने प्रभु की निंदा करने वालों को दंड दें। परंतु कोई आगे नहीं आया।





