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शिव महिमा⏱ 2 मिनट पठन

हलाहल विष को पीने के लिए शिव ने क्यों आगे बढ़े?

शिव ने हलाहल इसलिए पिया क्योंकि उनकी अनंत करुणा थी और वे सृष्टि के स्वामी हैं।

संक्षिप्त उत्तर

शिव ने हलाहल इसलिए पिया क्योंकि उनकी अनंत करुणा थी और वे सृष्टि के स्वामी हैं। कोई अन्य देव या दानव उस विष को ग्रहण करने में सक्षम नहीं था। शिव जी की योगशक्ति और दिव्य देह ही उसे धारण कर सकती थी।

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विस्तृत उत्तर

भगवान शिव ने हलाहल विष पीने के लिए स्वयं आगे आए — इसके पीछे उनकी अनंत करुणा और लोककल्याण की अदम्य भावना थी।

जब हलाहल की ज्वाला से समस्त जीव-जगत संकट में पड़ा और न देवता, न असुर, न कोई अन्य प्राणी उस विष को ग्रहण करने में सक्षम था, तब सभी देवता भयभीत होकर भगवान शिव के पास दौड़े और करबद्ध होकर उनसे सृष्टि की रक्षा करने की प्रार्थना की।

शिव जी का स्वभाव है — जब भक्त या समाज संकट में हो, तो वे तत्काल प्रकट होकर रक्षा करते हैं। वे जानते थे कि यदि यह विष पृथ्वी पर फैल गया तो सम्पूर्ण सृष्टि नष्ट हो जाएगी। शिव सर्वेश्वर हैं — उनके भीतर समस्त सृष्टि समाहित है — इसलिए उनकी योगशक्ति और दिव्य देह में वह विष समाहित हो सकता था जो किसी अन्य के लिए असहनीय था।

शिव ने देवताओं की प्रार्थना सुनकर माता पार्वती से विमर्श किया और सृष्टि की रक्षा के लिए उस महाविष को स्वयं पीने का निश्चय किया। यह उनके त्याग, साहस और अखंड वैराग्य का परिचय था — जहाँ सारे देव हट गए, वहाँ महादेव स्वयं आगे आए। इसीलिए वे 'महादेव' — देवताओं के भी देव — कहलाते हैं।

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