विस्तृत उत्तर
रुद्राक्ष और शिव का संबंध अत्यंत गहरा और आत्मिक है। शिव रुद्राक्ष इसलिए धारण करते हैं क्योंकि रुद्राक्ष स्वयं उनके ही नेत्रों के अश्रु से उत्पन्न हुए हैं।
शिव पुराण में स्वयं शिव कहते हैं कि रुद्राक्ष उनका अपना स्वरूप है। जो शिव के स्वरूप को ही धारण करते हैं वे शिव कृपा के स्वाभाविक पात्र बनते हैं। रुद्राक्ष धारण करना शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक है और यह साधक के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत करता है।
शिव पुराण के अनुसार रुद्राक्ष महाघोर पापों का नाशक है। इसके दर्शन, स्पर्श और जप मात्र से पाप नष्ट होते हैं। इसीलिए शिव जी अपनी करुणा से रुद्राक्ष धारण करते हैं और भक्तों को इसे धारण करने की प्रेरणा देते हैं। शिव के गले में रुद्राक्ष की माला उनके वैराग्य, तपस्वी स्वभाव और लोककल्याण की भावना का प्रतीक है।
रुद्राक्ष में एक से चौदह तक मुख होते हैं और प्रत्येक मुख का विशिष्ट महत्व है। एकमुखी रुद्राक्ष साक्षात शिव का स्वरूप माना गया है। पंचमुखी रुद्राक्ष सर्वाधिक प्रचलित है। जो व्यक्ति 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र जपते हुए रुद्राक्ष धारण करता है, वह नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रहता है और उसका मन पवित्र रहता है। शिव पुराण के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने वाला साक्षात रुद्र को ही धारण करता है।





