विस्तृत उत्तर
दक्ष प्रजापति सनातन धर्म के एक अत्यंत महत्वपूर्ण पात्र हैं। पुराणों के अनुसार वे परमपिता ब्रह्मा के मानस पुत्र थे और प्रजापतियों में उन्हें विशेष स्थान प्राप्त था। ब्रह्मा जी ने उन्हें समस्त प्रजापतियों का नायक नियुक्त किया था। दक्ष के बारे में कहा गया है कि वे बलशाली, बुद्धिशाली और महापराक्रमी राजा थे। विष्णु भागवत पुराण में वे भगवान नारायण के परम भक्त बताए गए हैं। उनकी दो पत्नियाँ थीं — प्रसूति और वीरणी — जिनसे अनेक पुत्रियाँ उत्पन्न हुईं और इन्हीं पुत्रियों से सृष्टि आगे बढ़ी।
शिव से विवाद के बारे में पुराणों में तीन प्रमुख कारण मिलते हैं। पहला, दक्ष शिव के वेश-भूषा और स्वभाव को पसंद नहीं करते थे — भस्म लपेटे, गले में सर्प, जटाजूट और श्मशानवासी शिव को वे अपनी पुत्री के योग्य नहीं मानते थे। दूसरा, दक्ष की इच्छा के विरुद्ध सती ने स्वयंवर में शिव का वरण किया, जिससे दक्ष अत्यंत रुष्ट हुए। तीसरा और सर्वाधिक प्रचलित कारण — एक यज्ञ में जब सभी देवताओं ने दक्ष के आगमन पर खड़े होकर सम्मान दिया, परंतु शिव ब्रह्मा जी के साथ बैठे रहे। शिव उनके दामाद थे और दामाद के लिए खड़े होना आवश्यक नहीं था, परंतु दक्ष ने इसे अपना अपमान माना और शिव को यज्ञभाग से वंचित करने का शाप दे दिया। यहीं से इनका शत्रुभाव गहरा हो गया।





