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शिव महिमा⏱ 2 मिनट पठन

पार्वती ने शिव का गला क्यों दबाया जब वे विष पी रहे थे?

संक्षिप्त उत्तर

माता पार्वती ने शिव का गला इसलिए दबाया ताकि विष उदर में न जाए — क्योंकि शिव के भीतर सम्पूर्ण सृष्टि है और विष वहाँ पहुँचता तो सृष्टि नष्ट हो जाती। माता की शक्ति ने विष को कंठ में ही स्थिर रखा।

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विस्तृत उत्तर

माता पार्वती का शिव जी के गले को दबाने का यह कृत्य शक्ति और शिव के एकत्व का सुंदर प्रतीक है और इसके पीछे एक गहरा कारण है।

जब शिव जी ने हलाहल विष को अपने कंठ में उतारना शुरू किया, तो उस क्षण माता पार्वती ने पत्नी के स्वाभाविक वात्सल्य और चिंता से आगे आकर तत्काल शिव जी के कंठ को अपने दोनों हाथों से दबा दिया।

इसके दो गहरे कारण थे। पहला — यदि वह विष उनके उदर में उतर जाता, तो शिव जी के भीतर विद्यमान समस्त सृष्टि नष्ट हो जाती। शिव के भीतर ब्रह्मांड समाहित है। इसलिए विष को उदर तक पहुँचने से रोकना अनिवार्य था। दूसरा — यदि विष ऊपर वापस उगल दिया जाता, तो वह वायुमंडल में फैलकर समस्त सृष्टि को नष्ट कर देता। इसलिए उसे कंठ में ही स्थिर करना आवश्यक था।

माता पार्वती — जो आदिशक्ति का स्वरूप हैं — ने अपनी शक्ति से उस विष को कंठ में ही बाँध दिया। इस प्रकार न विष उदर में गया और न ऊपर लौटा — वह कंठ में ही धारण हो गया। इससे शिव जी का गला नीला पड़ गया। यह घटना यह सिखाती है कि शिव और शक्ति का मिलन ही सृष्टि की रक्षा का आधार है। शिव ने विष का साहस दिखाया और शक्ति ने उसे संतुलित किया।

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