शिव पुराण परिचयउमा संहिता में किसका वर्णन हैउमा संहिता (8,000 श्लोक) में देवी पार्वती के अद्भुत चरित्र, शिव-पार्वती संवाद में आध्यात्मिक उपदेश, गृहस्थ धर्म और शिव-शक्ति की अभिन्नता का वर्णन है। उमा = पार्वती जो शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप का आधा भाग हैं।#उमा संहिता#पार्वती#अर्धनारीश्वर
शिव पुराण परिचयरुद्र संहिता में कौन-कौन से खंड हैंरुद्र संहिता में 5 खंड हैं — 1. सृष्टि खंड (शिव-महात्म्य) 2. सती खंड (सती विवाह, दक्ष-यज्ञ) 3. पार्वती खंड (पार्वती तपस्या, शिव-विवाह) 4. कुमार खंड (कार्तिकेय जन्म) 5. युद्ध खंड (शंखचूड़ आदि वध)।#रुद्र संहिता
शिव महिमाशिव जी के तीसरे नेत्र की उत्पत्ति कैसे हुई?शिव जी का तीसरा नेत्र तब प्रकट हुआ जब माता पार्वती ने उनकी दोनों आँखें ढक दीं और सृष्टि में अंधकार छा गया — शिव ने संकट में तीसरा नेत्र प्रकट किया। एक अन्य कथा में कामदेव द्वारा तप भंग करने पर तीसरा नेत्र खुला और कामदेव भस्म हुए।#शिव तीसरा नेत्र#त्रिनेत्र#पार्वती
शिव पूजा विधिशिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?शिवलिंग = पूरे परिवार का प्रतीक। क्रम: गणेश→पार्वती→कार्तिकेय→शिव→नंदी। लाभ: पारिवारिक एकता, बुद्धि (गणेश), सौभाग्य (पार्वती), साहस (कार्तिकेय), कल्याण (शिव)। संतान सुख। शिक्षा: विरोधी वाहन फिर भी एकसाथ = एकता।#शिव परिवार#पार्वती#गणेश
लोकहलाहल विष पेट में क्यों नहीं जाने दिया गया?विष पेट में जाता तो जगत को हानि हो सकती थी, इसलिए पार्वती ने उसे कंठ में रोक दिया।#हलाहल पेट#शिव#पार्वती
लोकपार्वती जी ने शिव जी का गला क्यों पकड़ा?पार्वती जी ने विष को शिव के पेट में जाने से रोकने के लिए उनका गला पकड़ा।#पार्वती#शिव विष#नीलकंठ
नाम और स्वरूपमाँ शैलपुत्री को सती का पुनर्जन्म क्यों माना जाता है?सती पुनर्जन्म क्यों: पूर्व जन्म में = प्रजापति दक्ष की पुत्री सती → पिता के यज्ञ में स्वयं को आहुति दी। अगले जन्म में = हिमालय की बेटी पार्वती के रूप में जन्म → इसीलिए शैलपुत्री।#सती पुनर्जन्म#दक्ष यज्ञ#आत्माहुति
रत्न, ग्रह और अधिष्ठात्री देवीमोती की अधिष्ठात्री देवी कौन हैं?मोती (चंद्र ग्रह) की अधिष्ठात्री देवी भगवती गौरी (पार्वती) हैं — वे चंद्रमा की सौम्य, शीतल और पोषण प्रदान करने वाली शक्ति का मातृ-स्वरूप हैं।#मोती अधिष्ठात्री#भगवती गौरी#पार्वती
नीलकंठ स्वरूप और कालकूट विषपानविषपान के समय पार्वती ने क्या किया?विषपान के समय देवी पार्वती ने शिव का कंठ दबा दिया ताकि विष शरीर में न जाए — इससे विष कंठ में रुक गया और शिव नीलकंठ कहलाए।#पार्वती#विषपान#कंठ
नीलकंठ स्वरूप और कालकूट विषपानशिव के कंठ का रंग नीला कैसे हुआ?विषपान के समय देवी पार्वती ने शिव का कंठ दबा दिया जिससे विष कंठ में रुक गया और उसके प्रभाव से कंठ का रंग नीला हो गया।#नीला कंठ#पार्वती#विष
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्यऋषि भृंगी ने पार्वती की पूजा क्यों नहीं की?ऋषि भृंगी केवल शिव के भक्त थे और शिव-शक्ति में भेद मानते थे, इसीलिए उन्होंने पार्वती की पूजा से इनकार किया।#ऋषि भृंगी#पार्वती#शिव भक्त
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्यपार्वती ने महादेव से क्या इच्छा प्रकट की थी?पार्वती ने महादेव से 'अंग से अंग' मिलाकर हमेशा के लिए साथ रहने की इच्छा प्रकट की थी, जिससे अर्धनारीश्वर स्वरूप का प्राकट्य हुआ।#पार्वती#महादेव#भक्ति
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्यस्कंदपुराण में अर्धनारीश्वर रूप कैसे प्रकट हुआ?स्कंदपुराण के अनुसार, पार्वती ने शिव से 'अंग से अंग' मिलाकर रहने की इच्छा प्रकट की — उनकी इस परम भक्ति और प्रेम से अर्धनारीश्वर रूप का प्राकट्य हुआ।#स्कंदपुराण#अर्धनारीश्वर#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डतपस्या और दृढ़ संकल्प की शिक्षा — पार्वती प्रसंग से?'जन्म कोटि लगि रगर हमारी' — करोड़ जन्म हठ, सप्तर्षियों की परीक्षा में अडिग। शिक्षा — दृढ़ संकल्प से असम्भव भी सम्भव।#बालकाण्ड#तपस्या#दृढ़ संकल्प
रामचरितमानस — बालकाण्ड'गिरिजा' कौन हैं?पार्वतीजी — गिरि (पर्वत/हिमवान) की पुत्री। 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए।' अन्य नाम — उमा, भवानी, अम्बिका, गौरी, शैलकुमारी, अपर्णा।#बालकाण्ड#गिरिजा#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी ने पार्वती पूजन में क्या-क्या अर्पित किया?मानस में विस्तृत सामग्री वर्णन संक्षिप्त है। सीताजी ने पार्वतीजी के मन्दिर में चरणों में वन्दना की, हाथ जोड़कर स्तुति की, और प्रेमपूर्वक पूजन किया। मुख्य भाव — हृदय से प्रार्थना और मनोरथ निवेदन।#बालकाण्ड#सीता पूजन#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी ने माता पार्वती से कैसा वर माँगा?सीताजी ने सीधे शब्दों में नहीं कहा — 'मोर मनोरथु जानहु नीकें' — मेरा मनोरथ आप जानती हैं। नारदजी के वचन स्मरण कर मन में पवित्र प्रीति जागी — रामजी उनके वर बनें, यही हृदय भाव से प्रार्थना।#बालकाण्ड#सीता#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डशिवजी ने राम अवतार के कितने कारण बताये?शिवजी ने अनेक कारण बताये पर कहा — 'इदमित्थं कहि जाइ न सोई' — निश्चित संख्या नहीं कही जा सकती। प्रमुख कारण — धर्म हानि, जय-विजय शाप, नारद शाप, मनु-शतरूपा वरदान, प्रतापभानु कथा, भक्त प्रेम। कारण अनन्त हैं।#बालकाण्ड#अवतार कारण संख्या#शिवजी
रामचरितमानस — बालकाण्डसप्तर्षियों ने परीक्षा उत्तीर्ण होने पर पार्वतीजी को क्या आशीर्वाद दिया?सप्तर्षि बोले — 'जय जय जगदंबिके भवानी!' — आप माया हैं, शिवजी भगवान हैं, आप दोनों जगत के माता-पिता हैं। मुनि पार्वतीजी के चरणों में सिर नवाकर बार-बार पुलकित होते हुए चले गये।#बालकाण्ड#सप्तर्षि आशीर्वाद#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डपार्वतीजी ने 'अपर्णा' नाम कैसे पाया?'अपर्णा' = अ (बिना) + पर्णा (पत्ते) = पत्तों के बिना रहने वाली। जब पार्वतीजी ने तपस्या में सूखे पत्ते खाना भी छोड़ दिया, तब उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा। चौपाई — 'पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नामु तब भयउ अपरना॥'#बालकाण्ड#अपर्णा#पार्वती
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर क्या भविष्यवाणी की?नारदजी ने कहा — (1) सब गुणों की खान, सुन्दर, सुशील, (2) पति को सदा प्यारी, सुहाग अचल, (3) जगत में पूज्य होगी। परन्तु एक दोष बताया — वर निर्गुण, निलज, कुबेष, अकुल, अगेह, दिगम्बर होगा — जो शिवजी के ही लक्षण हैं।#बालकाण्ड#नारद#भविष्यवाणी
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी हिमवान के घर क्यों आये?नारदजी ने पार्वतीजी के जन्म के समाचार सुनकर कौतुकवश हिमवान के घर आये। पर्वतराज ने बड़ा आदर किया। नारदजी ने पार्वतीजी का हाथ देखकर भविष्यवाणी की और शिवजी प्राप्ति के लिये तपस्या का उपाय बताया।#बालकाण्ड#नारदजी#हिमवान
पौराणिक कथाएँकामदेव को शिव ने क्यों भस्म किया?देवों के आग्रह पर कामदेव ने तारकासुर वध के लिए शिव की तपस्या भंग करने हेतु पुष्प बाण चलाया। क्रोधित शिव ने तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया। तभी से वे 'अनंग' (शरीर रहित) कहलाए।#कामदेव#शिव#भस्म
शिवशीघ्र विवाह के लिए भगवान शिव का कौन सा मंत्र जपना चाहिएविवाह हेतु 'ॐ साम्ब सदाशिवाय नमः' मंत्र और सोमवार के दिन शिव-पार्वती की विधिवत पूजा फलदायी होती है।#विवाह#शिव मंत्र#पार्वती
महिला एवं धर्मपार्वती माता तप से स्त्रियां क्या सीखेंदृढ़ संकल्प (मना करने पर भी), आत्म-सम्मान (अपमान सहन नहीं), कठिन परिश्रम (शॉर्टकट नहीं), प्रेम+शक्ति संतुलन, नई शुरुआत। पार्वती=बेटी+तपस्विनी+पत्नी+माता+योद्धा।#पार्वती#तप#स्त्री
व्रतहरतालिका तीज व्रत कैसे रखें विधि सहितहरतालिका तीज: भाद्रपद शुक्ल तृतीया। निर्जला व्रत (जल भी वर्जित)। बालू से शिव-पार्वती प्रतिमा → षोडशोपचार पूजा → कथा श्रवण → रात्रि जागरण → अगले दिन पारण। कथा: पार्वती ने शिव प्राप्ति हेतु किया। सौभाग्य, मनचाहा वर।#हरतालिका#तीज#पार्वती
पौराणिक कथागणेश जी की कथा क्या है?गणेश जी का जन्म माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से किया। शिव जी ने अनजाने में उनका सिर काट दिया, फिर हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया और 'प्रथम पूज्य' घोषित किया। माता-पिता की परिक्रमा से प्रथम पूज्य का वरदान मिला। परशुराम से युद्ध में एक दाँत टूटने से 'एकदंत' नाम पड़ा।#गणेश कथा#जन्म कथा#हाथी का सिर
शिव लीलापार्वती ने शिव की आँखें क्यों ढक दी थीं और उससे क्या हुआ?पार्वती ने शिव की आँखें खेल-भाव से ढकी थीं। इससे पूरे जगत में घोर अंधकार हो गया। सृष्टि बचाने के लिए शिव ने तीसरा नेत्र खोला। उसकी उष्मा से पार्वती के पसीने की बूँदों से एक भयंकर बालक 'अंधक' प्रकट हुआ।#पार्वती#शिव आँखें#अंधकार
शिव महिमापार्वती ने शिव का गला क्यों दबाया जब वे विष पी रहे थे?माता पार्वती ने शिव का गला इसलिए दबाया ताकि विष उदर में न जाए — क्योंकि शिव के भीतर सम्पूर्ण सृष्टि है और विष वहाँ पहुँचता तो सृष्टि नष्ट हो जाती। माता की शक्ति ने विष को कंठ में ही स्थिर रखा।#पार्वती#शिव विषपान#गला दबाया
शिव महिमाशिव ने हलाहल विष को गले में क्यों रोका, नीचे क्यों नहीं उतरने दिया?शिव के भीतर समस्त सृष्टि समाहित है — विष उदर में जाता तो सृष्टि नष्ट हो जाती। माता पार्वती ने गला दबाकर विष को कंठ में ही रोक दिया। इससे शिव जी का कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए।#हलाहल#शिव गला#नीलकंठ