विस्तृत उत्तर
जब पार्वतीजी ने तपस्या के दौरान सूखे पत्ते (पर्ण) खाना भी छोड़ दिया तब उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा।
चौपाई — 'पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नामु तब भयउ अपरना॥'
इसका अर्थ — फिर सूखे पर्ण (पत्ते) भी छोड़ दिये, तभी पार्वतीका नाम 'अपर्णा' हुआ।
'अपर्णा' शब्द की व्युत्पत्ति:
- ▸'अ' = बिना/रहित
- ▸'पर्णा' = पत्ते
- ▸अपर्णा = पत्तों के बिना रहने वाली — अर्थात् जिसने पत्ते खाना भी त्याग दिया
यह पार्वतीजी की तपस्या का चरम बिन्दु था। पहले कन्दमूल-फल खाये, फिर साग, फिर सूखे बेलपत्र, और अन्त में पत्ते भी छोड़ दिये — पूर्ण निराहार। इसी कारण उन्हें 'अपर्णा' नाम मिला जो आज भी पार्वतीजी का एक प्रसिद्ध नाम है।




