शिव-सती-पार्वती कथापार्वती ने कितने वर्ष तपस्या की शिव को पाने के लिएशिव पुराण के अनुसार पार्वती ने 3,000 वर्ष कठोर तपस्या की। कुछ परंपराओं में इससे भी अधिक और 108 जन्मों की तपस्या का उल्लेख है। तपस्या की कठोरता सभी परंपराओं में सर्वसम्मत है।#पार्वती तपस्या वर्ष#3000 वर्ष#कठोर तप
शिव-सती-पार्वती कथाहिमवान की पुत्री पार्वती ने शिव को पाने के लिए क्या कियापार्वती ने हिमालय के गौरी-शिखर पर 3,000 वर्ष कठोर तपस्या की — पहले फलाहार, फिर पत्ते और फिर कुछ नहीं (अपर्णा)। शिव-नाम जप, उपवास और पंचाग्नि साधना से शिव का आसन हिला।
नाम और स्वरूपमाँ ब्रह्मचारिणी को 'अपर्णा' क्यों कहते हैं?'अपर्णा' = जिन्होंने पत्ते तक खाना छोड़ दिया। तपस्या क्रम: फल-फूल → सूखे बिल्व पत्र → निर्जला निराहार। इसी कठोर तप के कारण 'अपर्णा' नाम मिला।#अपर्णा#पत्ते त्याग#निर्जला निराहार
रामचरितमानस — बालकाण्डपार्वतीजी ने 'अपर्णा' नाम कैसे पाया?'अपर्णा' = अ (बिना) + पर्णा (पत्ते) = पत्तों के बिना रहने वाली। जब पार्वतीजी ने तपस्या में सूखे पत्ते खाना भी छोड़ दिया, तब उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा। चौपाई — 'पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नामु तब भयउ अपरना॥'#बालकाण्ड#अपर्णा#पार्वती