विस्तृत उत्तर
पार्वती की तपस्या की अवधि के विषय में शिव पुराण और अन्य पुराणों में उल्लेख मिलता है।
तीन हजार वर्ष — शिव पुराण की परंपरा के अनुसार पार्वती ने तीन हजार वर्ष तक कठोर तपस्या की। उन्होंने सूखकर गिरे हुए बेलपत्र का सेवन करते हुए घोर तप किया। उनकी कठोर तपस्या देखकर ऋषि-मुनि भी दंग रह गए।
भिन्न-भिन्न उल्लेख — कुछ शास्त्रीय परंपराओं में इससे अधिक वर्षों का और कुछ में 108 जन्मों की घोर तपस्या का भी वर्णन है। जो भी अवधि हो, तपस्या की कठोरता सर्वसम्मत है।
तपस्या की कठोरता — ग्रीष्म में पंचाग्नि में बैठकर, शीत में जल में खड़े होकर, वर्षा में खुले में रहकर तप किया। पहले फलाहार, फिर पर्णाहार, फिर जलाहार और अंत में निराहार — इस क्रम में तपस्या की कठोरता बढ़ती गई।





