विस्तृत उत्तर
दक्ष के यज्ञ-विध्वंस और उनके वध के बाद ब्रह्मा, विष्णु और समस्त देवता तथा ऋषि-मुनि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के पास गए और विनयपूर्वक प्रार्थना की।
पुनर्जीवन का कारण — प्रमुख कारण यह था कि दक्ष का यज्ञ अधूरा रह गया था। शास्त्रों में अधूरा यज्ञ सृष्टि के लिए अशुभ माना जाता है। ब्रह्माजी ने शिव से निवेदन किया कि यज्ञ पूर्ण होना आवश्यक है इसलिए दक्ष को जीवनदान दिया जाए।
शिव की क्षमाशीलता — भोलेनाथ ने बहुत प्रार्थना के बाद अपना क्रोध शांत किया। शिव पुराण में वर्णित है कि शिव ने स्वयं दक्ष को अपनी भक्तवत्सलता, ज्ञानी भक्त की श्रेष्ठता और तीनों देवों की एकता का उपदेश दिया।
दक्ष ने शिव को प्रणाम किया और यज्ञ पूर्ण किया। सभी देवता अपने-अपने स्थान को लौट गए। यह प्रसंग शिव की असीम क्षमाशीलता और भक्तवत्सल स्वभाव का प्रमाण है।





